विदेश मंत्री एस. जयशंकर का युद्धों पर बड़ा बयान: शांति के लिए बातचीत जरूरी
जयशंकर का बयान
नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को वैश्विक संघर्षों पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यूक्रेन और मध्य पूर्व में चल रहे युद्धों का बोझ उन लोगों पर पड़ रहा है, जिनका इससे कोई संबंध नहीं है। आम जनता महंगे ईंधन, खाद्य संकट और आर्थिक मंदी का सामना कर रही है। जयशंकर ने यूएन डे पर आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन में कहा, "दुनिया में आज दो प्रमुख युद्ध चल रहे हैं- एक यूक्रेन में और दूसरा पश्चिम एशिया में। समाज और अर्थव्यवस्था, जिनका इन संघर्षों में कोई हस्तक्षेप नहीं है, वही इसकी कीमत चुका रहे हैं। हमें असहाय दर्शक नहीं बनना चाहिए।"
शांति के लिए संवाद की आवश्यकता
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत वही बात कह रहा है जो अधिकांश लोग महसूस कर रहे हैं- युद्ध का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही संभव है, न कि युद्ध के मैदान से। भारत इस दिशा में प्रयास कर रहा है और अन्य देशों के साथ मिलकर शांति के लिए काम करने को तत्पर है।
#WATCH | Delhi: At the Chinmaya Amrit Mahotsav Global Sammelan on UN Day, EAM Dr. S. Jaishankar says, "... There are today two major conflicts going on in the world: in Ukraine and in West Asia or the Middle East. Societies and economies, peoples far away, who have little say in the matter, are actually paying the cost. We cannot remain helpless spectators. India expresses global sentiment when we urge that dialogue and diplomacy are the only solution. We are making efforts ourselves and are open to working with other partners to that end..."
— Media House October 25, 2026
संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे संस्थानों में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों, विशेषकर ग्लोबल साउथ को निर्णय लेने की प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जा सकता। सुधार के साथ बहुपक्षीयता की मांग भी बढ़ रही है। उन्होंने कहा, "हम एक अधूरी दुनिया में रहते हैं, लेकिन इसे बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यूएन के लिए इसका मतलब है अपनी कमियों को पहचानना और सुधार करना।"
आतंकवाद पर कड़ा संदेश
विदेश मंत्री ने आतंकवाद को शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि शासन के हथियार के रूप में इसका उपयोग अस्वीकार्य है और इसे किसी भी स्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता। "आतंकवाद आज भी जारी है क्योंकि सभी देश इसके खिलाफ जीरो टॉलरेंस नहीं दिखाते। कुछ लोग राजनीतिक लाभ को अधिक महत्व देते हैं। दुनिया को इस साझा खतरे के खिलाफ एकजुट होना होगा," जयशंकर ने कहा।
