वीरता पुरस्कार से सम्मानित कॉन्स्टेबल तारिक हुसैन की बहादुरी की कहानी
कॉन्स्टेबल तारिक हुसैन को मरणोपरांत कीर्ति चक्र
गृह मंत्रालय में कार्यरत कॉन्स्टेबल तारिक हुसैन को मरणोपरांत देश के दूसरे सबसे बड़े वीरता पुरस्कार, कीर्ति चक्र, से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें जम्मू के सांबा जिले में 27 मार्च 2025 को हुई एक मुठभेड़ में दिखाई गई अद्वितीय बहादुरी के लिए प्रदान किया गया, जहां उन्होंने पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के दो सशस्त्र आतंकियों के खिलाफ अंतिम क्षण तक मोर्चा संभाला।
तारिक हुसैन की अदम्य साहस
भारी गोलीबारी और ग्रेनेड हमलों में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, तारिक हुसैन ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर दोनों आतंकियों को मार गिराया, लेकिन इस संघर्ष में उन्होंने अपनी जान गंवा दी। उनकी बहादुरी और बलिदान के लिए उन्हें यह वीरता पुरस्कार दिया गया।
आतंकियों से अंतिम क्षण तक लड़े चार जांबाज जवान
तारिक हुसैन के साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस के हेड कांस्टेबल जगबीर सिंह, एसजीसीटी बलविंदर सिंह और जसवंत सिंह ने भी आतंकियों से शेरों की तरह मुकाबला किया। इस मुठभेड़ में चारों जवान वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी बहादुरी की कहानियाँ आज भी जम्मू-कश्मीर के कठुआ और अखनूर गांवों में बच्चों की जुबान पर हैं।
एनकाउंटर की पूरी कहानी
पुलिस को 23 मार्च 2025 को गांव वालों से सूचना मिली कि जम्मू के सांबा जिले में सीमा के पास कुछ विदेशी आतंकवादी छिपे हुए हैं। सूचना मिलते ही जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत एक संयुक्त ऑपरेशन शुरू किया। आतंकियों ने पहली रात अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफलता पाई। DSP धीरज सिंह कटोच और इंस्पेक्टर अजय सिंह चिब की टीम, जिसमें कॉन्स्टेबल तारिक हुसैन भी शामिल थे, उनका पीछा करती रही। अंततः उन्हें बानी-बसोली-बिलावर के दुर्गम इलाके में घेर लिया गया।
आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हो गए 4 जवान
27 मार्च की सुबह लगभग 9 बजे, अच्छी पोजीशन में छिपे आतंकियों ने अचानक अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर दीं। ये आतंकवादी प्रशिक्षित थे और पाकिस्तान के जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हुए थे। जवानों ने साहस के साथ जवाबी फायरिंग की और अपनी पोजीशन पर डटे रहे। इस भीषण गोलीबारी और ग्रेनेड हमलों में जगबीर सिंह, जसवंत सिंह, तारिक हुसैन और बलविंदर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में शहीद हो गए। उनकी इस कुर्बानी के कारण ही आतंकियों को घेरकर समाप्त किया जा सका।
सुरक्षाबलों की बहादुरी
दूसरी ओर, गोली और छर्रे लगने के बावजूद DSP धीरज सिंह कटोच डटे रहे, और बिना चोट खाए इंस्पेक्टर अजय सिंह चिब पूरी बहादुरी से टीम का नेतृत्व करते रहे। अंततः अन्य सुरक्षाबलों की मदद से घेराबंदी को मजबूत किया गया और दोनों विदेशी आतंकियों को मार गिराया गया। उनके पास से एक M4 राइफल, दो AK-47, ग्रेनेड, ₹21.5 लाख नकद, इलेक्ट्रॉनिक सामान और राशन बरामद हुआ।
