वोटर लिस्ट विवाद: चुनाव आयोग के खिलाफ बढ़ता विरोध और इस्तीफे की मांग
वोटर लिस्ट पुनरीक्षण विवाद
वोटर लिस्ट पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहा विवाद अब और भी गंभीर होता जा रहा है। इस संदर्भ में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी जोर पकड़ रही है। दिल्ली के जंतर-मंतर समेत विभिन्न राज्यों में विपक्षी दल और आम नागरिक विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर लगातार सवाल उठाता रहा है। अब NDA यानी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस के भीतर से भी CEC ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए जा रहे हैं.
विवाद की जड़ें
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब एक खोजी रिपोर्ट ने चुनाव आयोग के भीतर चल रहे मतभेदों और आंतरिक कलह को उजागर किया। आरोप है कि पिछले साल SIR अभियान के दौरान चुनाव आयुक्तों को कई महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी नहीं दी गई थी। दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन निर्णयों पर बार-बार आपत्ति जताई थी.
विरोध का कारण
SIR के तहत चुनाव आयोग ने देशभर में वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण शुरू किया, जिसके चलते करोड़ों वोटरों के नाम गलत तरीके से हटाए जाने का आरोप लगा। इस मुद्दे पर विपक्ष ने बिहार और पश्चिम बंगाल में लंबे समय से प्रदर्शन किया है। संसद में भी 'वोट चोर' और 'गद्दी छोड़ो' जैसे नारे लगाए गए हैं.
महाभियोग प्रस्ताव
विपक्ष ने संसद में CEC को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाने की कोशिश की थी। वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं, जबकि अन्य चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, संधू और जोशी ने फॉर्म 6 में बदलाव और वोटर लिस्ट डेटाबेस पर नियंत्रण जैसे मुद्दों को उठाया था.
प्रदर्शन और मांगें
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया। हाल के दिनों में विपक्ष ने चुनाव आयोग को घेरने का प्रयास किया है। रिपोर्ट के बाद, 25 सितंबर 2026 को NDA के सहयोगी दलों ने भी चुनाव आयोग से SIR के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा.
विवाद का विस्तार
इस विवाद ने तब और तूल पकड़ा जब चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट से करोड़ों नाम हट गए, जिससे असली वोटरों का अधिकार छिनने का आरोप लगा। हाल ही में एक रिपोर्ट में सामने आया कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार लिखित आपत्ति दी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि विवाद केवल बाहरी नहीं, बल्कि आयोग के भीतर भी है.
मुख्य चेहरे
इस विवाद के केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं, जिन पर आरोप है कि उन्होंने अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना महत्वपूर्ण निर्णय लिए। विपक्षी नेता राहुल गांधी और अन्य नेता जैसे मल्लिकार्जुन खरगे और जयराम रमेश भी इस मुद्दे में शामिल हैं.
विवाद का केंद्र
यह विवाद मुख्य रूप से दिल्ली में केंद्रित है, जहां विपक्ष ने कई बार नारेबाजी की है। जंतर-मंतर पर भी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। बिहार वह राज्य है जहां SIR के खिलाफ सबसे पहले विवाद शुरू हुआ, इसके बाद पश्चिम बंगाल में CEC ज्ञानेश कुमार को काले झंडे दिखाए गए.
आगे की चुनौतियाँ
इस मामले में अब चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। 2023 का कानून CJI को CEC चुनने वाले पैनल से बाहर कर चुका है, जिससे विपक्ष का कहना है कि इससे आयोग सरकार के प्रभाव में आ गया है.
