शिक्षा पर खर्च में कमी: छात्रों की आवाज़ें उठ रही हैं
छात्रों के मुद्दों पर बढ़ता विवाद
देशभर में छात्रों के मुद्दों को लेकर हलचल तेज हो गई है। नीट परीक्षा के पेपर लीक के बाद, छात्र शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसी बीच, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने संसद के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए शिक्षा पर खर्च के मुद्दे को उठाया। यह एक ऐसा विषय है जिस पर सभी सरकारें चर्चा करती हैं, लेकिन कार्यान्वयन में कमी रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा पर खर्च एक दीर्घकालिक निवेश है, जिसके चलते सरकारें अन्य क्षेत्रों में अधिक खर्च करती हैं। मोदी सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षा के लिए जीडीपी का 6 प्रतिशत खर्च करने का वादा किया था, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
शिक्षा पर खर्च का लक्ष्य
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में केंद्र और राज्यों के संयुक्त सार्वजनिक शिक्षा खर्च को जीडीपी के 6 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। यह सुझाव 1968 में कोठारी कमीशन द्वारा दिया गया था। हालांकि, छह साल बाद भी यह लक्ष्य प्राप्त करना मुश्किल नजर आ रहा है। छात्रों के मुद्दों के उभरने के साथ, सरकार पर सवाल उठने लगे हैं।
शिक्षा पर सार्वजनिक निवेश
NEP में कहा गया है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, डिजिटल बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की क्षमता को बढ़ाने के लिए सार्वजनिक निवेश में वृद्धि आवश्यक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का कुल सार्वजनिक शिक्षा व्यय अभी भी जीडीपी का लगभग 4 से 4.6 प्रतिशत के बीच है। यह 1968 में निर्धारित लक्ष्य से काफी दूर है।
केंद्रीय बजट में शिक्षा का प्रावधान
वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट में शिक्षा मंत्रालय के लिए लगभग 1.28 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। हालांकि, भारत जैसे युवा जनसंख्या वाले देश में यह राशि शिक्षा क्षेत्र की आवश्यकताओं के मुकाबले सीमित है। सरकार अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने में असफल रही है। 'रियलाइजिंग राइट्स: ए हैंडबुक ऑफ वेलफेयर इन इंडिया' रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा पर सरकारी खर्च साल दर साल बढ़ा है, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि के अनुपात में शिक्षा पर निवेश नहीं बढ़ा है। नतीजतन, पिछले कई दशकों से शिक्षा पर सार्वजनिक खर्च लगभग 3.5 से 4.5 प्रतिशत जीडीपी के बीच बना हुआ है।
अन्य देशों की तुलना
दुनिया के कई प्रमुख देश भारत की तुलना में शिक्षा पर अधिक सार्वजनिक निवेश करते हैं। यूनेस्को और ओईसीडी के हालिया आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका शिक्षा पर सार्वजनिक और निजी निवेश मिलाकर अपनी जीडीपी का लगभग 6 प्रतिशत खर्च करता है, जबकि केवल सार्वजनिक खर्च लगभग 5 प्रतिशत है। ब्रिटेन भी शिक्षा पर लगभग 5.5 से 5.7 प्रतिशत जीडीपी खर्च करता है। वहीं, चीन का सार्वजनिक शिक्षा व्यय पिछले कुछ वर्षों से जीडीपी के लगभग 4 प्रतिशत के आसपास बना हुआ है।
बजट में शिक्षा की हिस्सेदारी में कमी
हालांकि सरकार यह दावा कर सकती है कि हर बजट में शिक्षा मंत्रालय को पिछले साल की तुलना में अधिक धन आवंटित किया जा रहा है, लेकिन पिछले 12 वर्षों के बजट आंकड़े बताते हैं कि शिक्षा मंत्रालय की हिस्सेदारी लगातार घट रही है। इसके विपरीत, सड़क और हाईवे जैसे बुनियादी ढांचे पर खर्च का अनुपात तेजी से बढ़ा है। साल 2013-14 में शिक्षा मंत्रालय को कुल केंद्रीय बजट का 4.6 प्रतिशत हिस्सा मिला था, जबकि 2025-26 में यह घटकर 2.5 प्रतिशत रह गया है। इस प्रकार, 12 वर्षों में शिक्षा मंत्रालय की हिस्सेदारी लगभग आधी रह गई है।
