शिमला में बारिश से धंस रहे पहाड़, 100 से अधिक मकान खतरे में
बड़ी चिंता का विषय
किसी भी समय हो सकता है बड़ा हादसा, लोगों की बढ़ी चिंता
शिमला: मानसून के दौरान हो रही भारी बारिश के कारण हिमाचल प्रदेश में प्रतिदिन कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं हो रही हैं। शिमला के ग्रामीण क्षेत्र शकराला-मल्याणा में भू-धंसाव की आशंका ने स्थानीय निवासियों की चिंता को बढ़ा दिया है। प्रभावित क्षेत्र में लगभग 100 से अधिक भवन हैं, जिनमें कई में बार-बार दरारें देखी जा रही हैं, जिससे भवनों के गिरने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
भूस्खलन की बढ़ती घटनाएं
मानसून के दौरान जमीन में हलचल से लोगों में भय का माहौल है। पिछले कुछ वर्षों से इस क्षेत्र में जमीन खिसकने और धंसने की घटनाएं बढ़ रही हैं। शिमला ग्रामीण के एसडीएम मनजीत शर्मा ने बताया कि प्रशासन ने स्थिति का निरीक्षण किया है। प्रारंभिक जांच में तीन मकानों में हल्की दरारें पाई गई हैं, लेकिन अभी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन क्षेत्र की लगातार निगरानी कर रहा है और रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी जाएगी।
विशेषज्ञों की टीम का अध्ययन
भू-धंसाव के कारणों का पता लगाने के लिए विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया गया है। विशेषज्ञ जमीन की स्थिति, जल निकासी और क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों का विश्लेषण करेंगे। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जमीन खिसकने के पीछे प्राकृतिक कारण हैं या मानवीय गतिविधियों का भी योगदान है।
प्रदेश में मानसून के दौरान 177 मौतें
हिमाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन से संबंधित घटनाओं में 177 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 30 जून से 13 अगस्त के बीच प्राकृतिक आपदाओं और सड़क हादसों में ये मौतें हुई हैं। इसके अलावा, सार्वजनिक और निजी संपत्ति को 955.52 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। वर्तमान में 136 सड़कें बारिश और भूस्खलन के कारण बाधित हैं।
भारी बारिश का नया दौर
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 14, 17 और 18 अगस्त को विभिन्न स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। 14 अगस्त को लाहौल स्पीति, किन्नौर, कुल्लू और ऊना को छोड़कर अन्य जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है।
