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शिवसेना (UBT) को संसद कार्यालय छोड़ने का सामना करना पड़ सकता है

शिवसेना (UBT) को संसद में कार्यालय खोने का खतरा है, क्योंकि पार्टी के पास अब केवल 4 सांसद बचे हैं। छह सांसदों की बगावत के बाद, संसद भवन के नियमों के अनुसार, केवल 5 या अधिक सांसदों वाली पार्टी को ही कार्यालय आवंटित किया जा सकता है। इस स्थिति में, उद्धव गुट को अपना मौजूदा कार्यालय खाली करना पड़ सकता है। जानें इस राजनीतिक संकट के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित परिणाम।
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शिवसेना (UBT) को संसद कार्यालय छोड़ने का सामना करना पड़ सकता है

सांसदों की संख्या में कमी, 5 या अधिक सांसदों वाली पार्टी को मिलेगा कार्यालय


शिवसेना यूबीटी को एक और झटका लगने वाला है, क्योंकि छह सांसदों की बगावत के बाद अब उद्धव गुट के पास केवल 4 सांसद (तीन लोकसभा और एक राज्यसभा) रह गए हैं। इसके परिणामस्वरूप, संसद परिसर में यूबीटी के कार्यालय को खोने का खतरा बढ़ गया है। संसद भवन के नियमों के अनुसार, केवल 5 या अधिक सांसदों वाली पार्टी को ही संसद भवन में कार्यालय आवंटित किया जा सकता है।


छह सांसदों का शिंदे गुट में विलय बना कारण

जब लोकसभा अध्यक्ष छह सांसदों के शिंदे गुट में विलय को औपचारिक रूप से मान्यता देंगे, तब यूबीटी के पास केवल 4 सांसद (3 लोकसभा और 1 राज्यसभा) रह जाएंगे।


इस स्थिति में, उन्हें संसद भवन में अपना मौजूदा कार्यालय (128a) खाली करना पड़ सकता है। पार्टी के दो लोकसभा सांसद अनिल देसाई और अरविंद सावंत बुधवार शाम लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात करेंगे।


6 सांसद हुए डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल

शिंदे के साथ सभी 6 सांसदों ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर टूट का ऐलान किया। शिंदे ने कहा कि जब 2022 में उन्होंने पार्टी और धनुष-बाण को बचाने के लिए विद्रोह किया था, तब 40 विधायक थे और अब उन्होंने छक्का लगाया है।


उन्होंने यह भी कहा कि उनकी लड़ाई बालासाहेब के विचारों को संरक्षित करने के लिए है, इसलिए आज ये 6 सांसद बालासाहेब की असली शिवसेना में शामिल हुए हैं। उद्धव के नेतृत्व में यह पार्टी में चार साल में दूसरी बड़ी बगावत है।