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शी जिनपिंग का भारत दौरा: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने का ऐतिहासिक पल

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सात साल बाद भारत का दौरा किया, जहां उन्होंने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लिया। उनके साथ आए त्साई छी और वांग यी जैसे प्रमुख सहयोगियों का चीन की राजनीति और विदेश नीति में महत्वपूर्ण स्थान है। क्या यह दौरा भारत-चीन संबंधों में सुधार का संकेत है? जानें इस दौरे के पीछे की कहानी और दोनों देशों के बीच बढ़ते रिश्तों के बारे में।
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चीन के राष्ट्रपति का भारत आगमन

सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए कदम रखा। एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने उनका स्वागत किया। उनके साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है, जिसमें प्रमुख कारोबारी और चीनी सरकारी अधिकारी शामिल हैं। जिनपिंग के साथ दो अन्य प्रभावशाली व्यक्ति भी भारत आए हैं, जिनका चीन की राजनीति और विदेश नीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव है।


त्साई छी: शी जिनपिंग के करीबी सहयोगी

त्साई छी: त्साई छी को राष्ट्रपति शी जिनपिंग का सबसे करीबी सहयोगी माना जाता है। 70 वर्ष की आयु में भी, उनका राजनीतिक कद कम नहीं हुआ है। कम्युनिस्ट पार्टी के संगठन और प्रशासन में उनकी मजबूत पकड़ है। त्साई छी सीपीसी सेंट्रल पार्टी स्कूल और नेशनल एकेडमी ऑफ गवर्नेंस के प्रमुख हैं, और सीपीसी केंद्रीय समिति के जनरल कार्यालय के निदेशक की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।


शी जिनपिंग के दाहिने हाथ का प्रभाव

त्साई छी को चीन का दूसरा सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माना जाता है, हालांकि वे अक्सर पर्दे के पीछे काम करते हैं। पिछले वर्ष, जब पीएम मोदी शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में शामिल होने तियानजिन पहुंचे थे, तब त्साई छी ने उनसे मुलाकात की थी। ट्रंप के चीन आगमन पर उनसे मिलने वाले पहले नेता भी त्साई छी थे। उन्हें शी जिनपिंग का असली चीफ ऑफ स्टाफ कहा जाता है। 2017 के बाद से उनका करियर ऊंचाइयों पर पहुंचा है, जब उन्हें 25 सदस्यीय पोलित ब्यूरो में स्थान मिला। 2022 में, उन्हें सात सदस्यीय पोलित ब्यूरो का सदस्य बनाया गया।


वांग यी: चीन की विदेश नीति का चेहरा

वांग यी: चीन की विदेश नीति में वांग यी का प्रभाव स्पष्ट है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने उन्हें शी जिनपिंग की वैश्विक महत्वाकांक्षा का प्रवक्ता बताया है। वे चीन के उन गिने-चुने राजनयिकों में से हैं, जिन्हें कम्युनिस्ट पार्टी की शक्तिशाली पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी में स्थान मिला है। वे चीन के सबसे लंबे समय तक विदेश मंत्री रहने वाले नेताओं में से एक हैं और केंद्रीय विदेश आयोग के कार्यालय के निदेशक की जिम्मेदारी भी उनके पास है। हाल ही में, अजीत डोभाल ने चीन की यात्रा की थी, जिसमें सीमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी। बीजिंग में उनकी मुलाकात विदेश मंत्री वांग यी से हुई थी।


भारत-चीन संबंधों में सुधार

क्या भारत-चीन के रिश्ते सुधार की ओर बढ़ रहे हैं?


पूर्वी लद्दाख में साढ़े चार वर्षों से चल रहे सैन्य गतिरोध के बाद, भारत और चीन के बीच संबंध 2024 में सुधार की ओर बढ़ने लगे हैं। दोनों देशों ने पिछले दो वर्षों में कई बैठकें आयोजित की हैं, ताकि आपसी विश्वास को बहाल किया जा सके। पीएम मोदी ने पिछले साल 7 अगस्त को चीन की यात्रा की थी, जहां उन्होंने तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में भाग लिया। अब, सात साल बाद, शी जिनपिंग का भारत आगमन दोनों देशों के बीच सुधरते रिश्तों का संकेत है।