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शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी, 25 साल का रिकॉर्ड टूटा

शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है, जो पिछले 25 वर्षों में सबसे लंबा है। गुरुवार को बीएसई का संवेदी सूचकांक 1,045 अंक गिरकर 71,593 पर बंद हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली इसके प्रमुख कारण हैं। जानें इस गिरावट के पीछे के अन्य कारण और बाजार की वर्तमान स्थिति के बारे में।
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शेयर बाजार में गिरावट का दौर


मुंबई में शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है। पिछले दो दिनों में जो थोड़ी बहुत सुधार देखने को मिला था, वह गुरुवार को समाप्त हो गया। 8 अक्टूबर को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक 1,045 अंक की गिरावट के साथ 71,593 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 371 अंक की कमी आई, जो 22,232 पर समाप्त हुआ। यह लगातार नौवें हफ्ते शेयर बाजार में गिरावट का दौर है, जो 25 साल का रिकॉर्ड तोड़ रहा है। इस दिन मेटल, ऑटो और रियल्टी शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली देखी गई।


गिरावट के कारण

गुरुवार को आई इस बड़ी गिरावट के पीछे रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि को एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। रिजर्व बैंक ने 44 महीने में पहली बार ब्याज दर बढ़ाई है और यह संभावना जताई जा रही है कि भविष्य में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा, विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली भी शेयर बाजार को प्रभावित कर रही हैं।


कच्चे तेल की कीमतें 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। इसके साथ ही, विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसे निकाल रहे हैं। वैश्विक बाजार में बॉंड की बिक्री में तेजी आई है, जिसके कारण अमेरिका के 30 साल के बॉंड पर कमाई 5.71 फीसदी से अधिक हो गई है। 10 साल के बॉंड की कमाई भी 5.3 फीसदी से ऊपर चली गई है। बॉंड यील्ड में वृद्धि के कारण निवेशक शेयर बाजार से पैसे निकाल रहे हैं। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई के जल्द समाप्त होने के आसार नहीं हैं।