शेयर बाजार में निवेश: लाभ और हानि का सच
शेयर बाजार में निवेश की वास्तविकता
सरकारों की नीति रही है कि वे वित्तीय संपत्तियों में निवेश को बढ़ावा दें। इससे शेयर बाजार में उछाल आया और अर्थव्यवस्था में चमक देखने को मिली। लेकिन इस चमक की कीमत उन निवेशकों ने चुकाई है, जो इस चकाचौंध में फंस गए।
कोरोना महामारी के दौरान भारत में शेयर बाजार में आई तेजी के बारे में यह धारणा बनी कि निवेशकों को बड़ा लाभ हुआ है। हालाँकि, एक वित्तीय पत्रिका के हालिया विश्लेषण से पता चलता है कि यह सच नहीं है। पिछले 3-5 वर्षों में कई शेयरों ने फिक्स्ड डिपॉजिट और पोस्ट ऑफिस में जमा राशि से कम या उसके बराबर रिटर्न दिया है। इसका मतलब यह है कि सूचकांक में जो तेजी आई, वह कुछ विशेष शेयरों और क्षेत्रों तक ही सीमित रही, जबकि अन्य शेयर पीछे रह गए। रिलायंस, एचडीएफसी बैंक, और टीसीएस जैसे बड़े शेयरों में भी निवेश से अपेक्षित रिटर्न कम रहा। इससे यह धारणा भी टूट गई कि "बड़ा शेयर, सुरक्षित मुनाफा"।
इस अध्ययन में 2,867 स्टॉक्स शामिल थे, जिसमें यह सामने आया कि पिछले तीन वर्षों में लगभग 43 प्रतिशत निवेशकों को नुकसान हुआ, जिनमें से लगभग 11 प्रतिशत ने 50 प्रतिशत से अधिक की राशि खो दी।
हालांकि, लगभग 21 प्रतिशत निवेशकों को 100 प्रतिशत से अधिक लाभ हुआ। 12 प्रतिशत को 50 से 100 प्रतिशत तक और लगभग 23 प्रतिशत को 50 प्रतिशत तक लाभ मिला। इस दौरान, बैंक एफडी में 6.5 प्रतिशत की ब्याज दर पर निवेश करने से 21.34 प्रतिशत और पोस्ट ऑफिस में 7 प्रतिशत की दर पर निवेश करने से कुल रिटर्न 21.56 प्रतिशत प्राप्त हुआ।
इस विश्लेषण का उद्देश्य यह नहीं है कि एफडी में निवेश शेयरों से बेहतर है, बल्कि यह बताना है कि शेयर बाजार हमेशा उच्च रिटर्न की गारंटी नहीं देता। लाभ केवल उन्हीं को मिलता है जो इस क्षेत्र की पूरी जानकारी रखते हैं और उच्च जोखिम उठाने में सक्षम होते हैं। पहले के अध्ययनों से यह स्पष्ट हो चुका है कि अधिकांश नुकसान छोटे निवेशकों को ही होता है।
