संसद का मानसून सत्र स्थगित, विपक्ष पर उठे सवाल
संसद का मानसून सत्र स्थगित
गुरुवार को संसद का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। सरकार ने इस निर्णय का कारण बताया कि सत्र के दौरान चर्चाओं की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं थी। केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि विपक्ष ने उचित बहस की अनुमति नहीं दी। उन्होंने बताया कि इस सत्र में कुल 12 विधेयक पारित किए गए, जबकि लोकसभा की कार्य उत्पादकता केवल 19 प्रतिशत रही। इस बार प्रश्नकाल और शून्यकाल का आयोजन नहीं हो सका।
विपक्ष की भूमिका पर सवाल
रिजिजू ने कहा, 'हमने 12 विधेयक पारित किए, लेकिन चर्चा की गुणवत्ता पर हमें संतोष नहीं है, क्योंकि विपक्ष ने लोकसभा में उचित बहस की अनुमति नहीं दी। यह पहली बार है जब मैंने विपक्ष को चर्चा से बचते देखा है। विपक्ष सरकार से जवाब मांगता है, और सरकार उन्हें देने के लिए बाध्य है। फिर भी, संसद में हमने देखा कि सरकार खुद चर्चा का आह्वान कर रही थी, जबकि विपक्ष इससे बचने के बहाने ढूंढ रहा था। यह संसदीय लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।'
बिना चर्चा के विधेयक पारित
उन्होंने आगे कहा कि लोकसभा में 11 विधेयक बिना चर्चा के पारित हुए, जबकि केवल एक विधेयक पर चर्चा हुई। राज्यसभा में विधेयक पर पूरी चर्चा हुई। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और कुछ अन्य सदस्य सदन से बाहर चले गए, जबकि अन्य विपक्षी दलों ने भाग लिया।
हंगामा और नारेबाजी का माहौल
रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद केवल हंगामा और गाली-गलौज में लगे रहते हैं। नए सांसदों के लिए खेद व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें सार्थक बहस का अवसर नहीं मिला। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस सांसदों की मानसिकता बन गई है कि उनकी मुख्य भूमिका केवल नारे लगाना और हंगामा करना है। वे सुबह जल्दी उठकर संसद परिसर में जाते हैं और केवल हंगामा करते हैं। यही स्थिति उन्होंने खुद पैदा की है।'
सत्र का माहौल
विपक्षी दलों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी और दिल्ली में छात्रों पर कार्रवाई को मुद्दा बनाया और गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग की। पूरे सत्र में हंगामा और नारेबाजी का माहौल बना रहा। 28 और 29 जुलाई को सदन में सामान्य माहौल दिखा, जहां लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर लगभग दस घंटे तक चर्चा हुई।
मानसून सत्र के अंतिम दिन, लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही शुरू करते ही सदस्यों से राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सम्मान में खड़े होने के लिए कहा। आमतौर पर, सत्र समाप्ति के समय वह अपने पारंपरिक संबोधन में कार्य उत्पादकता और पारित विधेयकों का उल्लेख करते हैं।
