संसद में ऑपरेशन सिंदूर का मुद्दा फिर से गरमाया
ऑपरेशन सिंदूर का नया मोड़
पिछले साल मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद से संसद में इस सैन्य कार्रवाई, पाकिस्तान और अमेरिका के मुद्दे पर चर्चा होती रही है। अब जब अगले महीने मानसून सत्र होने वाला है, ऑपरेशन सिंदूर फिर से चर्चा का विषय बन गया है। भारत सरकार ने पहली बार यह जानकारी दी है कि इस ऑपरेशन के दौरान छह भारतीय सैनिक शहीद हुए, जिनमें से पांच थल सेना के और एक वायु सेना का था। इन सभी शहीदों के नाम इंडिया गेट के युद्ध स्मारक पर अंकित किए गए हैं। यह एक सकारात्मक कदम है कि देश ने अपने शहीदों को याद किया है। लेकिन, यह भी सच है कि संसद में सरकार ने पहले कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर में किसी सैनिक की हानि नहीं हुई।
पिछले साल के मानसून सत्र में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 25 जुलाई को सदन में कहा था कि यदि विपक्ष जानना चाहता है कि ऑपरेशन सिंदूर में किसी बहादुर जवान की हानि हुई है, तो इसका उत्तर है, नहीं। उनकी इस बात पर सदन में तालियां बजीं और मेजें थपथपाई गईं। हालांकि, यह सच है कि शहीदों के ताबूत उनके घर लौटे थे और लोग जानते थे कि शहादत हुई है। अब सरकार ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि छह सैनिक शहीद हुए। इसलिए, विपक्ष इसे विशेषाधिकार का मुद्दा बना रहा है और संसद के पहले दिन इस मुद्दे को उठाने की योजना बना रहा है। ध्यान देने वाली बात यह है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की छवि अच्छी रही है, इसलिए उन्हें हर बार विपक्ष के साथ बातचीत के लिए आगे किया जाता है। अब देखना होगा कि संसद में सरकार इस मुद्दे पर कैसे प्रतिक्रिया देती है।
