संसद में पेपर लीक बिल पर चर्चा के लिए विपक्ष ने दी सहमति
संसद का मानसून सत्र: गतिरोध का अंत
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच चल रहा गतिरोध अब समाप्त हो गया है। विपक्ष ने पेपर लीक से संबंधित बिल पर चर्चा के लिए सहमति दे दी है। यह चर्चा मंगलवार को होगी। सोमवार को विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार ने 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रीवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' पेश किया। उल्लेखनीय है कि यह कानून दो साल पहले 2024 में बनाया गया था, लेकिन नीट यूजी के पेपर लीक होने के कारण इसमें संशोधन की आवश्यकता पड़ी।
सोमवार को मानसून सत्र के छठे दिन भी कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। विपक्ष ने दिल्ली के जंतर मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया। इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी नेताओं से बातचीत की, जिसके परिणामस्वरूप दोनों पक्षों ने मंगलवार, 28 जुलाई को बिल पर चर्चा करने का निर्णय लिया। चर्चा के बाद इस पर वोटिंग भी होगी।
सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद दोपहर 12 बजे से बिल पर चर्चा शुरू होने की संभावना है। इससे पहले, सरकार ने सोमवार को इस बिल पर चर्चा कराने का प्रयास किया था, लेकिन विपक्ष छात्रों पर लाठीचार्ज के मामले पर बहस के लिए अड़ा रहा। कांग्रेस ने गृह मंत्री अमित शाह से इस मुद्दे पर सदन में बयान देने की मांग की, जिसके कारण लोकसभा की कार्यवाही चार बार स्थगित हुई।
इस बिल में पेपर लीक रोकने के लिए कई कड़े प्रावधान शामिल हैं। सजा को बढ़ाकर पांच से 10 साल किया गया है और जुर्माने की राशि 10 करोड़ रुपए तक निर्धारित की गई है। यदि यह बिल पारित होता है, तो पेपर लीक की जांच दो महीने में पूरी होगी और तीन महीने में फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई होगी। इसके बाद एक महीने में हाई कोर्ट में अपील की जा सकेगी, और हाई कोर्ट को भी तीन महीने में सुनवाई पूरी करनी होगी।
इस कानून के लागू होने के बाद राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का अधिकार मिलेगा, जहां मामलों की रोजाना सुनवाई होगी। यह कानून केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कानून के बारे में जानकारी देने के लिए इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया था और परीक्षा की व्यवस्था में सुधार के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति भी बनाई है।
