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संसद में विपक्ष का प्रदर्शन: राहुल गांधी और अखिलेश यादव की अनुपस्थिति पर उठे सवाल

हाल ही में संसद में विपक्ष के प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और अखिलेश यादव की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलचल को जन्म दिया है। इंडिया गठबंधन के सांसदों ने चुनाव आयोग के समक्ष एकजुट होकर कई मांगें रखीं। इस प्रदर्शन में शामिल दलों की एकजुटता और यूपी की राजनीति का असर दिल्ली में कैसे दिख रहा है, जानें इस लेख में।
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राजनीतिक हलचल का केंद्र

देश की संसद, आकाशवाणी और नीति आयोग के बीच राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है, जिससे पूरे देश की नजरें इस ओर टिकी हुई हैं। अखिलेश यादव और राहुल गांधी, जो इस क्षेत्र में सक्रिय हैं, एक साथ नजर नहीं आ रहे हैं।


उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों पार्टियों के बीच चल रहे तनाव का यह असर विपक्ष ने नहीं सोचा था।


विपक्ष का एकजुटता

इंडिया गठबंधन के लगभग 150 सांसद मंगलवार को चुनाव आयोग के समक्ष एकत्र हुए। इस जमावड़े ने संसद, आकाशवाणी और नीति आयोग के बीच की राजनीति को और भी केंद्रित कर दिया। सभी सांसद स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को रद्द करने की मांग कर रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं।


कौन-कौन सी पार्टियां शामिल हैं?

इस प्रदर्शन में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी, शिवसेना (UBT), वामपंथी दल, बीजेडी, आरजेडी जैसे दलों के सांसद शामिल हुए। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर सभी की नजरें थीं, लेकिन दोनों नेता एक साथ नहीं दिखे।


क्या यूपी की राजनीति का असर दिल्ली में दिख रहा है?

राहुल और अखिलेश का साथ न होना उत्तर प्रदेश की राजनीति से जोड़ा जा रहा है। कांग्रेस यूपी विधानसभा चुनाव के लिए 200 से अधिक सीटों की मांग कर रही है, जिससे सपा का नेतृत्व नाराज है।


सपा की नाराजगी का कारण यह है कि कांग्रेस ने 2022 के विधानसभा चुनाव में केवल दो सीटें जीती थीं, फिर भी वह 200 सीटें मांग रही है। अखिलेश यादव और सपा ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उनकी तैयारी सभी 403 सीटों पर है।


कांग्रेस ने भी अपनी तैयारी 403 सीटों पर होने की बात कही है। ऐसे में दोनों नेताओं का बड़े प्रदर्शन में साथ न होना राजनीतिक सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि, दोनों दलों की ओर से गठबंधन पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।