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सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन बंद, हूती विद्रोहियों का बढ़ता प्रभाव

पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हमलों के बाद इसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। हूती विद्रोहियों की बढ़ती गतिविधियों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस पाइपलाइन का महत्व और बाब अल-मंदेब पर कब्जे के संभावित प्रभावों पर चर्चा की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति बिगड़ती है, तो यह वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
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पश्चिम एशिया में ऊर्जा संकट गहराया

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के चलते ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक नया संकट उत्पन्न हो गया है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की लाल सागर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बढ़ती गतिविधियों और सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हमलों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि 10 सितंबर को रियाद और मदीना क्षेत्रों में ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर कई हमले हुए, जिसके कारण सुरक्षा कारणों से इसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। इन हमलों में कुछ लोग घायल हुए हैं और विशेषज्ञ टीमें पाइपलाइन की सुरक्षा और नुकसान का आकलन कर रही हैं।


ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का महत्व

करीब 1200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों को लाल सागर के पश्चिमी तट से जोड़ती है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि सऊदी अरब होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे बिना अपने कच्चे तेल को वैश्विक बाजार तक पहुंचा सकता है। यही कारण है कि होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर यह पाइपलाइन सऊदी तेल निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग बन गई थी। हाल के संकट के दौरान, सऊदी अरब ने यानबू बंदरगाह के माध्यम से लाखों बैरल तेल भेजने पर अधिक निर्भरता दिखाई है। ऐसे में पाइपलाइन का बंद होना न केवल सऊदी अरब के लिए, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी चिंता का विषय है।


हूतियों की बढ़ती ताकत

इस बीच, यमन में हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार बाब अल-मंदेब के आसपास अपनी सैन्य स्थिति को मजबूत किया है। हूतियों ने पहले रणनीतिक बंदरगाह शहर मोक्हा पर कब्जा किया और अब लाल सागर के द्वीपों की ओर बढ़ रहे हैं। यमनी अधिकारियों के अनुसार, हूतियों ने पेरिम द्वीप पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया है। इसके अलावा, बाब अल-मंदेब के सामने स्थित धुबाब पर भी उनकी पकड़ मजबूत होने की खबर है। पेरिम द्वीप की भौगोलिक स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बाब अल-मंदेब के बीचोंबीच स्थित है और यहां नियंत्रण से समुद्री मार्ग की निगरानी और प्रभावित करने की क्षमता बढ़ सकती है।


बाब अल-मंदेब पर कब्जे का प्रभाव

बाब अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके माध्यम से एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच तेल, गैस और अन्य सामान की आवाजाही होती है। इसके आगे, लाल सागर से जहाज स्वेज नहर के रास्ते भूमध्यसागर तक पहुंचते हैं। पहले से ही होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। यदि बाब अल-मंदेब पर भी जहाजों की आवाजाही बड़े पैमाने पर बाधित होती है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर दोहरे दबाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। लाल सागर में हूती गतिविधियों के कारण पहले ही बड़ी संख्या में जहाज वैकल्पिक मार्ग अपना चुके हैं। अब पेरिम और मोक्हा पर हूतियों की बढ़त से शिपिंग कंपनियों की चिंताएं और बढ़ गई हैं।


ईरान को मिल सकता है लाभ

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान, होर्मुज पहले से ही वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक बड़ा जोखिम बना हुआ है। यदि बाब अल-मंदेब के आसपास भी समुद्री यातायात प्रभावित होता है, तो खाड़ी से निकलने वाले तेल के लिए एक दूसरा महत्वपूर्ण रास्ता भी दबाव में आ सकता है। इसे वैश्विक ऊर्जा और कमोडिटी सप्लाई के लिए गंभीर जोखिम बताया जा रहा है। हालांकि, हूती नेतृत्व ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को पूरी तरह निशाना बनाने की बात से इनकार किया है। लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही सुरक्षित है।


तेल की कीमतों पर प्रभाव

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। बाब अल-मंदेब के आसपास हूतियों की बढ़त और होर्मुज में व्यवधान की आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया है। यदि दोनों प्रमुख समुद्री मार्गों से तेल की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो इसका असर केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहेगा। पेट्रोल-डीजल, विमान ईंधन, समुद्री माल ढुलाई और वैश्विक महंगाई पर भी इसका दबाव पड़ सकता है। हूती यमन का एक सशस्त्र राजनीतिक-सैन्य आंदोलन है, जिसकी जड़ें देश के जायदी शिया समुदाय में हैं। ईरान हूतियों का समर्थन करता है, जबकि तेहरान इस संगठन पर अपने सीधे नियंत्रण के आरोपों से इनकार करता है।