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सज्जन कुमार का निधन: 1984 के दंगों में दोषी पूर्व सांसद का सफर

कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन गुरुवार को हुआ। वह 1984 के सिख विरोधी दंगों में दोषी ठहराए जाने के बाद तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। सज्जन कुमार का राजनीतिक सफर दिल्ली में काफी महत्वपूर्ण रहा, जहां उन्होंने कई बार लोकसभा सांसद के रूप में कार्य किया। उनके जीवन में कई विवाद भी रहे, विशेषकर 1984 के दंगों से जुड़े मामलों में। इस लेख में उनके जीवन, राजनीतिक करियर और विवादों पर चर्चा की गई है।
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सज्जन कुमार का निधन


सज्जन कुमार का निधन: कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन गुरुवार को हुआ। उन्हें सफदरजंग अस्पताल लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी हालत गंभीर थी जब उन्हें अस्पताल लाया गया। उनके बेटे जग प्रवेश कुमार ने अस्पताल पहुंचकर इस दुखद समाचार की पुष्टि की। सज्जन कुमार लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे.


दिल्ली की राजनीति में सज्जन कुमार का योगदान

सज्जन कुमार का जन्म 23 सितंबर 1945 को दिल्ली में हुआ। उन्होंने 1970 के दशक में राजनीति में कदम रखा और पहले दिल्ली नगर निगम के काउंसलर बने। बाद में, उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव के रूप में कार्य किया। वह 1980, 1991 और 2004 में लोकसभा सांसद चुने गए। दिल्ली के बाहरी क्षेत्रों में कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में उनकी पहचान थी। उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के भाई संजय गांधी का करीबी माना जाता था। 2018 में दोषसिद्धि के बाद, उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।


1984 दंगों में सज्जन कुमार की सजा

सज्जन कुमार पर 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान भीड़ को उकसाने, हत्या और हिंसा भड़काने के गंभीर आरोप लगे थे। 17 दिसंबर 2018 को दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें पालम कॉलोनी मामले में दोषी ठहराया, जिसमें पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे में आग लगाने के आरोप शामिल थे। अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके अलावा, फरवरी 2025 में राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें सरस्वती विहार मामले में भी दोषी ठहराया, जिसमें जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुनदीप सिंह की हत्या के आरोप थे। हालांकि, कुछ मामलों में उन्हें बरी किया गया था।