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सफदरजंग अस्पताल में ब्रांडेड दवाओं की बिक्री पर सवाल उठे

सफदरजंग अस्पताल में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर ब्रांडेड दवाओं की बिक्री की शिकायतें सामने आई हैं। मरीजों को जेनेरिक दवाओं की बजाय महंगी ब्रांडेड दवाएं दी जा रही हैं, जबकि अस्पताल प्रशासन इस पर चुप्पी साधे हुए है। जानिए इस मुद्दे पर मरीजों का क्या कहना है और अस्पताल प्रशासन ने अब तक क्या कदम उठाए हैं।
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सफदरजंग अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़

देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, सफदरजंग, की ओपीडी में हर दिन हजारों लोग डॉक्टरों से अपनी समस्याओं का समाधान खोजने आते हैं। अस्पताल परिसर में 'प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र' (PBJAK) स्थापित है, जहां मरीजों को जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इस औषधि केंद्र के बाहर बड़े अक्षरों में '80 से 50 फीसदी की छूट' का उल्लेख है, जो दर्शाता है कि सरकार मरीजों को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं प्रदान कर रही है।


ब्रांडेड दवाओं की बिक्री पर चिंता

केंद्र सरकार का दावा है कि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएं और स्वास्थ्य उत्पाद बाजार की कीमतों से 50 से 80 फीसदी कम पर मिलते हैं। लेकिन सफदरजंग अस्पताल के PBJAK में मरीजों को ब्रांडेड दवाएं मिल रही हैं, जो जेनेरिक दवाओं की तुलना में महंगी हैं।


मरीजों से बातचीत में खुलासा

हमने सफदरजंग अस्पताल के जन औषधि केंद्र से दवाएं खरीदने वाले चार मरीजों से बातचीत की। यह पता चला कि उन्हें यहां ब्रांडेड दवाएं ऊंचे दामों पर बेची जा रही हैं, जबकि मरीज इस बात से अनजान थे।


सुभाष शाह का अनुभव

बिहार के निवासी सुभाष शाह, जो सफदरजंग के कार्डियोलॉजी विभाग में डॉक्टर से मिल रहे थे, ने PBJAK से दवा खरीदी। उन्होंने हमें बताया कि उन्हें Unitas हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड की Valsatas-S-50MG टैबलेट मिली, जिसकी कीमत 609.38 रुपये थी। 67.50 फीसदी छूट के बाद उन्हें यह दवा 198 रुपये में मिली।


सृष्टि भारती का मामला

फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन विभाग में सृष्टि भारती ने Avicenna लाइफ साइंसेज की Cinocal Plus टैबलेट खरीदी। उन्होंने 322 रुपये की दो पत्तियां लीं, जिसके लिए उन्हें 500 रुपये का भुगतान करना पड़ा।


मोहम्मद शहादत की दवा

मोहम्मद शहादत ने भी ब्रांडेड दवा खरीदी, जिसका बिल 720 रुपये था। 41.67 फीसदी छूट के बाद उन्हें 420 रुपये का भुगतान करना पड़ा।


अस्पताल प्रशासन की चुप्पी

जब हमने सफदरजंग अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी से इस मामले पर प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। कई बार संपर्क करने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी।


प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना का उद्देश्य

यह परियोजना 2008 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य सभी लोगों को सस्ती दरों पर उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराना है। वर्तमान में, देशभर में 19,000 से अधिक जन औषधि केंद्र कार्यरत हैं।