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सरहिंद नहर में अनुपचारित सीवेज के बहाव को रोकने की मांग

शिरोमणी अकाली दल ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सरहिंद नहर में अनुपचारित सीवेज के बहाव को तुरंत रोकने की मांग की है। डाॅ. दलजीत सिंह चीमा ने अवैध डिस्चार्ज प्वाइंट का निरीक्षण करने और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
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अकाली दल की कार्रवाई की मांग

रूपनगर नगर निगम के सीवेज सिस्टम, एसटीपी, आउटलेट और अवैध डिस्चार्ज प्वाइंट का निरीक्षण करने की आवश्यकता पर जोर: डाॅ. दलजीत सिंह चीमा


चंडीगढ़: शिरोमणी अकाली दल ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समक्ष सरहिंद नहर में अनुपचारित सीवेज के बहाव को तुरंत रोकने की अपील की है।


अकाली दल के वरिष्ठ नेता डाॅ. दलजीत सिंह चीमा ने पीपीसीबी को दिए ज्ञापन में रूपनगर नगर परिषद के सीवेज सिस्टम, एसटीपी आउटलेट और अवैध डिस्चार्ज प्वाइंट का त्वरित निरीक्षण करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अवैध प्रदूषण फैलाने वालों की पहचान की जानी चाहिए और जहां उल्लंघन हो, वहां उचित कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।


ज्ञापन में पर्यावरण को होने वाले नुकसान का आकलन करने और जहां आवश्यक हो, वहां पर्यावरण क्षतिपूर्ति लागू करने की मांग की गई। इसके साथ ही, संबंधित अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया कि नगरपालिका सीवेज का पर्याप्त उपचार किया जाए।


डाॅ. चीमा ने कहा कि रूपनगर नगर परिषद के अंतर्गत उत्पन्न होने वाला अनुपचारित सीवेज और गंदा पानी सरहिंद नहर में छोड़ा जाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि नहर का पानी पेयजल और सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है। ज्ञापन में कहा गया है, 'यदि यह साबित होता है, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, जलीय पारिस्थितिकी, कृषि और राज्य के जल संसाधनों की गुणवत्ता के लिए अत्यंत खतरनाक है।'


अकाली नेता ने कहा कि मामले की गंभीरता इस संभावना से बढ़ गई है कि अवैध निर्वहन नियमित रूप से जारी रह सकता है। उन्होंने कहा, 'इसलिए, सामान्य प्रशासनिक जांच से प्रभावित जल संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाएगी।' उन्होंने तात्कालिक निरीक्षण, नमूना लेना और निवारक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।


डाॅ. चीमा ने कहा कि यह सुनिश्चित करना नगरपालिका अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में उत्पन्न सीवेज को ठीक से इकट्ठा करें, उपचारित करें और निपटान करें।


उन्होंने यह भी कहा कि जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत अवैध अपशिष्ट छोड़ने पर कार्रवाई की जानी चाहिए। यदि यह सिद्ध होता है कि अनुपचारित सीवेज को बिना आवश्यक सहमति के सरहिंद नहर में छोड़ा जा रहा है, तो इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।


सरहिंद नहर की सुरक्षा एक सार्वजनिक हित का मामला है, जो किसी एक नगरपालिका प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र से परे है। डाॅ. चीमा ने कहा, 'सिंचाई या पीने के पानी के लिए उपयोग की जाने वाली नहर में अनुपचारित नगरपालिका सीवेज का निर्वहन पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।'