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सहारनपुर में अवैध मस्जिद का ध्वस्तीकरण, प्रशासन ने की कार्रवाई

सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक अवैध मस्जिद को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया है। यह कार्रवाई सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद की गई, जिसमें मस्जिद को अवैध घोषित किया गया था। इस निर्णय पर बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती और अन्य नेताओं ने आलोचना की है, जबकि प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। जानें इस घटनाक्रम के सभी पहलुओं के बारे में।
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सहारनपुर में अवैध मस्जिद का ध्वस्तीकरण


उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक अवैध मस्जिद को शनिवार की सुबह ध्वस्त कर दिया गया। इस कार्रवाई की जानकारी पुलिस अधिकारियों ने दी।


पुलिस उपमहानिरीक्षक अभिषेक सिंह ने बताया कि यह मस्जिद सरकारी भूमि पर बनी थी और इसे सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने अवैध घोषित किया था। प्रशासन ने इसके ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की।


सिंह ने कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद जिला अदालत में अपील की गई थी, लेकिन अपील खारिज होने के बाद सरकारी भूमि को खाली कराने की कार्रवाई की गई।


इस मस्जिद को अवैध बताने वाली याचिका 2025 में बजरंग दल के प्रांतीय संयोजक विकास त्यागी द्वारा नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में दायर की गई थी। नगर मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई 2026 को इसे अवैध मानते हुए हटाने का आदेश दिया।


मस्जिद की इंतजामिया कमेटी ने नगर मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ जिला अदालत में अपील की, लेकिन जिला न्यायाधीश ने नगर मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए दखल देने से इनकार कर दिया।


सिंह ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया कानूनी तरीके से की गई है और प्रशासन ने शहर में शांति बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है।


उन्होंने बताया कि मौके पर पांच बटालियन पीएसी और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है, साथ ही संवेदनशील स्थानों पर पुलिस अधिकारियों की निगरानी भी की जा रही है।


बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में मस्जिदों को अवैध बताकर ध्वस्त करने का जो अभियान चल रहा है, वह उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से इस पर रोक लगाने की अपील की।


मायावती ने कहा कि एक संवैधानिक धर्मनिरपेक्ष सरकार का कर्तव्य है कि वह सभी धर्मों के मानने वालों और उनके धार्मिक स्थलों का समान सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करे।


सांसद इमरान मसूद, पूर्व सांसद फजलुरहमान और सांसद इकरा हसन ने इस मस्जिद के ध्वस्तीकरण की आलोचना की। सांसद हाजी फजलुरहमान ने कहा कि प्रशासन का निर्णय जल्दबाजी में लिया गया है और यह अत्यंत दुखद है।