साइबर ठगी से बचने के उपाय: जानें कैसे करें सुरक्षित लेन-देन
साइबर ठगी से बचने के लिए जरूरी कदम
चंडीगढ़, 25 जून, 2026। यदि आप साइबर ठगी का शिकार होते हैं, तो तुरंत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
फ्रॉड की सूचना देने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करने से आपके बैंक खाते से निकले पैसे को रोकने की संभावना बढ़ जाती है।
अगर यूपीआई लेन-देन में कोई बड़ी गड़बड़ी होती है, तो सीधे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करें। इससे आपका पूरा पैसा सुरक्षित रह सकता है।
यदि कोई जालसाज आपके खाते में गलती से पैसे भेजने का दावा करता है, तो उसे खुद पैसे ट्रांसफर करने के बजाय अपने बैंक या यूपीआई सेवा प्रदाता से संपर्क करने के लिए कहें। आधिकारिक ट्रांजेक्शन रिवर्सल अपनाएं।
कस्टमर केयर या अपनी होम ब्रांच से संपर्क करके पैसे वापस लेने की प्रक्रिया को पूरा करने की सलाह दें। किसी भी दबाव में न आएं।
अचानक आए अनजान पैसों को वापस भेजने की जल्दबाजी करना सबसे बड़ी गलती हो सकती है, जिससे आपका पूरा खाता खाली हो सकता है।
यदि कोई व्यक्ति फोन या मैसेज के जरिए बार-बार पैसे लौटाने का दबाव डालता है, तो तुरंत सतर्क होकर उसका नंबर ब्लॉक कर दें।
जालसाज अक्सर शुरुआत में आपके बैंक खाते या यूपीआई आईडी पर छोटी रकम ट्रांसफर करते हैं, जिससे वे आपको अपने जाल में फंसाते हैं।
पैसा ट्रांसफर करने के बाद, ये अपराधी आपके मोबाइल पर कॉल या मैसेज भेजते हैं और रोते हुए कहते हैं कि रकम गलती से चली गई है।
रकम वापस पाने के बहाने ये ठग एक फर्जी लिंक या यूपीआई रिक्वेस्ट भेजते हैं।
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अकाउंट में अचानक बंपर क्रेडिट का झांसा देकर भेजे गए लिंक पर क्लिक करते ही पीड़ित से यूपीआई पिन दर्ज करने को कहा जाता है, जिससे उनकी मेहनत की कमाई उड़ जाती है।
याद रखें, यूपीआई पिन का उपयोग केवल पैसे भेजने के लिए किया जाता है, किसी भी स्थिति में पैसे प्राप्त करने के लिए इसकी आवश्यकता नहीं होती।
आजकल साइबर अपराधी आपके नंबर पर बैंक अलर्ट जैसा दिखने वाला फर्जी मैसेज भेजते हैं, जो असली जैसा लगता है।
इस मैसेज को देखकर आम व्यक्ति को लगता है कि उसके खाते में सचमुच पैसा आ गया है, जबकि यह केवल एक साधारण टेक्स्ट मैसेज होता है।
किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करना, अपना सीक्रेट यूपीआई पिन डालना या बैंक का ओटीपी किसी अजनबी से साझा करना आपको कंगाल बना सकता है। विधिक कार्रवाई भी हो सकती है।
