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सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल से मिली छुट्टी

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। उन्होंने 28 जून से परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर अनशन किया था, जिसे 24 जुलाई को समाप्त किया गया। वांगचुक ने अपनी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार की जानकारी दी और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने का इरादा जताया। उन्होंने देशभर के लोगों का धन्यवाद किया और आगे भी समर्थन की उम्मीद जताई।
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सोनम वांगचुक की अस्पताल से छुट्टी

नई दिल्ली - सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सोमवार को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। वांगचुक ने 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर अनशन किया था, जिसे उन्होंने 24 जुलाई को 26 दिन बाद समाप्त किया।


उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस बारे में जानकारी साझा की। वांगचुक ने लिखा, "मुझे अस्पताल से छुट्टी मिल रही है। मैं महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए राजघाट जाऊंगा और फिर पहाड़ों पर लौटूंगा। सभी का धन्यवाद। मेदांता अस्पताल, गुड़गांव के डॉक्टरों और स्टाफ का भी आभार।"


एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, "आज वह दिन आ गया है जब मुझे अस्पताल से छुट्टी मिल रही है। अब मैं बेहतर महसूस कर रहा हूं। मैंने धीरे-धीरे खाना शुरू कर दिया है और मेरी ताकत लौट रही है। लद्दाख लौटने से पहले मैं राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दूंगा। आपको याद होगा कि इस अभियान की शुरुआत से पहले भी हम राजघाट गए थे।"


वांगचुक ने कहा, "लद्दाख लौटने से पहले मैं दिल से आप सभी का धन्यवाद करना चाहता हूं। देशभर के लोगों ने हमारी आवाज का समर्थन किया। हम आगे भी आपसे जुड़े रहने की उम्मीद करते हैं। सभी को नमस्कार और जय हिंद।"


अनशन समाप्त करने के बाद, वांगचुक ने एक वीडियो में बताया कि केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा, डॉ. जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख की प्रमुख संस्थाओं के नेताओं की उपस्थिति में उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने उनसे मिलकर या पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया और संसद में नीट तथा परीक्षा प्रणाली पर चर्चा का आश्वासन दिया।


उन्होंने यह भी बताया कि सरकार की ओर से आए मंत्रियों ने उन्हें आश्वासन दिया था। पिछले दो दिनों से लिखित आश्वासन पर बातचीत चल रही थी, जिसके कारण उनका अनशन दो दिन और बढ़ गया। अंततः उन्हें सरकार से लिखित आश्वासन प्राप्त हुआ।