सिक्किम में दर्दनाक सड़क हादसा: चार लोगों की जान गई
गंगटोक में हुआ भयानक हादसा
गंगटोक से सिलीगुड़ी जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-10 पर एक गंभीर दुर्घटना ने पूरे क्षेत्र को शोक में डाल दिया है। एक ही परिवार के चार सदस्यों के शव तीस्ता नदी में डूबी हुई कार से बरामद किए गए हैं। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए विनाशकारी है, बल्कि पूरे सिक्किम में गहरा सदमा पैदा कर गई है।
मृतकों की पहचान
मृतकों में 28 वर्षीय स्मारिका न्यौपाने, 27 वर्षीय सैब्या न्यौपाने, 27 वर्षीय जीका दहल और पांच वर्षीय दित्या छेत्री शामिल हैं। सभी पूर्वी सिक्किम के काबी लुंगचोक (लिंगडोक) क्षेत्र के निवासी थे। परिवार 5 जून को सिलीगुड़ी में भर्ती अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए निकला था, लेकिन यह यात्रा उनकी अंतिम यात्रा बन गई।
परिवार से संपर्क टूटना
परिवार से आखिरी बार 5 जून की शाम राम्बी क्षेत्र के पास संपर्क हुआ था। इसके बाद उनका मोबाइल फोन बंद हो गया और उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका। अगले दिन गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई, जिसके बाद बड़े पैमाने पर खोज अभियान शुरू किया गया।
खोज अभियान की चुनौतियाँ
इस खोज में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पश्चिम बंगाल पुलिस और स्थानीय बचाव दल शामिल हुए। लगातार बारिश और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद राहत कार्य जारी रहा।
हादसे का रहस्य
तलाशी के दौरान बाघपुल के निकट भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र से कार की बैटरी और बंपर मिले। इसके बाद बचाव दलों ने तीस्ता नदी में गहन खोजबीन शुरू की, क्योंकि आशंका थी कि वाहन अनियंत्रित होकर नदी में गिर गया होगा।
कार का पता लगाना
शनिवार शाम को बचाव दलों ने तीस्ता नदी में डूबी हुई टाटा नेक्सॉन कार का पता लगाया। हालांकि, खराब मौसम और तेज बहाव के कारण उसी रात रेस्क्यू अभियान रोकना पड़ा। रविवार सुबह अभियान फिर से शुरू किया गया और कई घंटों की मेहनत के बाद कार तक पहुंच बनाई गई।
सरकारी सेवाओं में कार्यरत थे मृतक
हादसे में जान गंवाने वाले तीनों वयस्क सरकारी सेवाओं से जुड़े हुए थे। स्मारिका न्यौपाने एसटीएनएम अस्पताल में नर्सिंग लेक्चरर थीं, सैब्या न्यौपाने संस्कृति विभाग में जूनियर इंजीनियर थीं, और जीका दहल बागवानी विभाग में कार्यरत थे।
NH-10 की सुरक्षा पर सवाल
प्रारंभिक जांच में लगातार बारिश, भूस्खलन और राष्ट्रीय राजमार्ग-10 की खराब स्थिति को हादसे के प्रमुख कारणों में से एक माना जा रहा है। इस घटना के बाद इस महत्वपूर्ण मार्ग की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय निवासियों की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि मानसून के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
