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सिद्धिविनायक मंदिर में चढ़ावे के विवाद ने महाराष्ट्र की राजनीति को गरमा दिया

सिद्धिविनायक मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित अनियमितताओं के आरोपों ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने आरोप लगाया है कि हर साल लगभग 18 करोड़ रुपये का दुरुपयोग हो रहा है। शिवसेना नेता संजय राउत ने भी इन आरोपों का समर्थन किया है। मंदिर ट्रस्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चढ़ावे में वृद्धि का कारण बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था है। इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है, जिससे राजनीतिक दलों की नजरें सरकार और जांच एजेंसियों पर टिकी हुई हैं।
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सिद्धिविनायक मंदिर में चढ़ावे की अनियमितताओं का मामला


मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित अनियमितताओं के चलते महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद उत्पन्न हो गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनका समर्थन शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने किया है। राउत का कहना है कि मंदिर के प्रबंधन में बदलाव के बाद से अनियमितताओं में वृद्धि हुई है। ठाकरे ने यह भी कहा कि मंदिर में हर साल लगभग 18 करोड़ रुपये के चढ़ावे का दुरुपयोग हो रहा है।


पत्र के खुलासे से बढ़ी बहस

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब मंदिर ट्रस्ट के आठ ट्रस्टियों ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को एक पत्र लिखा, जो सार्वजनिक हुआ। इस पत्र में कहा गया कि कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद मंदिर में चढ़ावे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ट्रस्टियों ने आशंका जताई कि पहले चढ़ावे की चोरी या कम रिकॉर्डिंग के कारण मंदिर को हर साल लगभग 18 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता था। इसके बाद राज ठाकरे ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।


ट्रस्ट ने आरोपों को किया खारिज

सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चढ़ावे में वृद्धि का कारण बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी है, न कि किसी वित्तीय अनियमितता का खुलासा। ट्रस्ट का कहना है कि संदिग्ध गतिविधियों में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है और व्यवस्था की कमियों को दूर कर दिया गया है। वर्तमान प्रणाली पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और प्रभावी है।


कर्मचारियों पर कार्रवाई का हवाला

ट्रस्ट ने बताया कि मार्च 2026 में उसकी शिकायत पर आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरती की थाली में चढ़ाई गई नकदी में कथित हेराफेरी करने का आरोप था। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मामला दर्ज कर कार्रवाई की। इसके अलावा इस वर्ष 19 अन्य कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की गई, जिन पर श्रद्धालुओं से शीघ्र दर्शन कराने के बदले पैसे लेने के आरोप लगे थे। जांच में बैंक खातों और यूपीआई लेनदेन के प्रमाण मिलने का भी दावा किया गया।


निष्पक्ष जांच की मांग, सरकार पर नजर

इस विवाद के बीच कई राजनीतिक दलों ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री छगन भुजबल ने भी निष्पक्ष जांच का समर्थन किया, जबकि कांग्रेस ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग उठाई। दूसरी ओर, मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि चढ़ावे की राशि त्योहारों और श्रद्धालुओं की संख्या के अनुसार स्वाभाविक रूप से घटती-बढ़ती रहती है। अब इस मामले में सरकार और जांच एजेंसियों के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं।