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सीजेपी प्रवक्ता ने पीएम मोदी के खिलाफ अपशब्दों के मामले में उठाई आवाज़

सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने जंतर-मंतर पर पीएम मोदी के खिलाफ अपशब्दों के मामले में नोएडा की युवती रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि अपशब्दों के लिए आपराधिक मामला नहीं बनता और पुलिस को अपनी ऊर्जा सांसदों पर लगानी चाहिए। दास ने युवाओं को परेशान करने के खिलाफ भी आवाज उठाई। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और सौरव दास के विचार।
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सीजेपी प्रवक्ता का बयान


नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपशब्दों का उपयोग करने के मामले में नोएडा की एक युवती के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने अपनी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि भले ही अपशब्दों का उपयोग निंदनीय हो, लेकिन पुलिस द्वारा आपराधिक न्याय प्रणाली का दुरुपयोग करना गलत है।


सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "रुचिका सिंह के खिलाफ आपराधिक तंत्र का दुरुपयोग अस्वीकार्य है। अपशब्दों के लिए आपराधिक मामला नहीं बनता। लोकसभा के 50% सांसदों पर आपराधिक मामले हैं, जिनमें से लगभग 100 बीजेपी के सांसद हैं। पुलिस को अपनी ऊर्जा उन पर लगानी चाहिए, न कि 25 साल की युवती पर! युवाओं को परेशान करना तुरंत बंद होना चाहिए।"




उन्होंने यह भी कहा कि इस देश में अपशब्दों का उपयोग कब से अपराध बन गया? लोग रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं। लोकसभा के 50% सांसदों पर गंभीर अपराधों के मामले चल रहे हैं, फिर भी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। यह पूरी तरह से निंदनीय है। मैं एक बार फिर सरकार और पुलिस से अपील करता हूं कि वे युवाओं को परेशान करना बंद करें। इस तरह से युवाओं को निशाना बनाना बंद करें और इस लड़की को छोड़ दें।


यह है मामला
दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान पीएम मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में रुचिका के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। चूंकि घटना दिल्ली में हुई थी, नोएडा पुलिस ने वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद मामले को दिल्ली पुलिस को सौंप दिया है।