सीबीआई कोर्ट ने राजा भैया को दी बड़ी राहत, हत्याकांड में कार्यवाही रद्द
सीबीआई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
नई दिल्ली। सीओ जियाउल हक हत्या मामले में, लखनऊ की सीबीआई विशेष अदालत ने शनिवार को कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और चार अन्य को बड़ी राहत प्रदान की। अदालत ने इन सभी के खिलाफ चल रही कार्यवाही को समाप्त कर दिया है। दिवंगत सीओ की पत्नी ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करते हुए सभी आरोपियों की भूमिका की पुनः जांच की मांग की थी।
कोर्ट का निर्णय और आरोपियों की स्थिति
विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा सिंह ने पर्याप्त सबूतों के अभाव में राजा भैया, उनके मीडिया प्रभारी हरिओम श्रीवास्तव, सपा नेता गुलशन यादव, गुड्डू सिंह और रोहित सिंह के खिलाफ आगे की कार्यवाही को समाप्त कर दिया। दिवंगत सीओ की पत्नी परवीन आजाद अदालत में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकीं, जिससे आरोपियों पर आरोप सिद्ध हो सके।
मामले का ऐतिहासिक संदर्भ
यह मामला तब शुरू हुआ जब 2 मार्च 2013 को ग्राम प्रधान नन्हे यादव की हत्या के बाद जियाउल हक मौके पर पहुंचे थे, जहां उनकी भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में, लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने 9 अक्टूबर 2024 को दस आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी।
राजा भैया का बयान
सीबीआई कोर्ट के फैसले के बाद, राजा भैया ने कहा कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन कभी पराजित नहीं होता। जनसत्ता दल के नेता दिनेश तिवारी ने बताया कि इस निर्णय से कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल है।
समर्थकों की खुशी
बाबागंज के पूर्व ब्लॉक प्रमुख हितेश प्रताप सिंह ने कहा कि सीबीआई से पहले भी उन्हें क्लीनचिट मिली थी। अब दोबारा क्लीनचिट मिलने से समर्थकों में खुशी का माहौल है। पार्टी के अन्य नेताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी।
