सीबीएसई चेयरमैन की संसद में पेशी पर उठे सवाल
संस्थाओं की जवाबदेही का मुद्दा
दुनिया के कई देशों में, जहां संस्थाओं को पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त है, वे भी संसद के प्रति जवाबदेह होती हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका में हर संस्था के प्रमुख को अपनी गतिविधियों के लिए सीनेट की समिति के समक्ष उपस्थित होना पड़ता है। संबंधित समिति किसी भी व्यक्ति को तलब कर सकती है, और वहां उपस्थित न होना या गलत जानकारी देना गंभीर परिणाम ला सकता है। भारत में भी पहले संसदीय समितियों का महत्व था, लेकिन वर्तमान सरकार में इनका महत्व काफी कम हो गया है।
हाल ही में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने यह स्पष्ट किया है कि उसके चेयरमैन को संसदीय समिति के सामने पेश होने की आवश्यकता नहीं है। यह तब सामने आया जब लोक लेखा समिति (पीएसी) ने सीबीएसई की कुछ हालिया गड़बड़ियों के संबंध में चेयरमैन लोखंडे प्रशांत सीताराम को बुलाया था। शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी ने समिति को बताया कि सीबीएसई एक स्वायत्त संस्था है और इसकी फंडिंग सरकार द्वारा नहीं की जाती, इसलिए चेयरमैन को पेश होना अनिवार्य नहीं है। इस पर विवाद उत्पन्न होने पर, जोशी ने अपने बयान को वापस लिया और कहा कि सीबीएसई इस मामले पर कानून मंत्रालय की सलाह लेगा। लेकिन उनके बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार के मंत्रालय संसदीय समितियों के प्रति क्या दृष्टिकोण रखते हैं।
