Newzfatafatlogo

सुचिका तरियाल ने सेमीफाइनल हार के बाद भ्रष्टाचार के आरोप लगाए

भारत की मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स फाइटर सुचिका तरियाल ने 60 किलोग्राम ट्रेडिशनल इवेंट के सेमीफाइनल में विवादास्पद हार के बाद भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मुकाबले में उनका दबदबा था, लेकिन जजों के निर्णय से निराश हैं। सुचिका ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि हर जगह भ्रष्टाचार है। उनके कोच ने भी आर्बिट्रेशन के फैसले पर सवाल उठाए। जानें पूरी कहानी में क्या हुआ और सुचिका का परिवार उनके साथ कैसे खड़ा है।
 | 

सुचिका तरियाल की विवादास्पद हार

नागोया - भारत की मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए) फाइटर सुचिका तरियाल ने सोमवार को 60 किलोग्राम ट्रेडिशनल इवेंट के सेमीफाइनल में एक विवादास्पद हार का सामना किया। उन्होंने इस हार के बाद आर्बिट्रेशन की अपील भी की, जिसे अस्वीकार कर दिया गया।


सुचिका ने सिंगापुर की फाइटर हून टून के खिलाफ मुकाबले में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन हार के फैसले से निराश दिखीं। हार के बाद उन्होंने आर्बिट्रेशन में अपनी असहमति जताई, जिसमें जजों ने मुकाबले की समीक्षा की और इसे ड्रॉ घोषित किया।


एशियन मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स एसोसिएशन (एएमएमए) के नियमों के अनुसार, ड्रॉ की स्थिति में कम वजन वाली फाइटर को विजेता माना जाता है। सुचिका ने इस विवादास्पद निर्णय पर नाराजगी व्यक्त की और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।


उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि उसे ही जीतना था, क्योंकि फेडरेशन सिंगापुर का है। अगर मेरा वजन थोड़ा कम भी होता, तो भी फैसला मेरे खिलाफ ही होता। उन्होंने अपने देश के बारे में सोचा, खिलाड़ी के बारे में नहीं। हर जगह भ्रष्टाचार है; मैंने आज यहां भी इसे देखा है।"


सुचिका ने यह भी बताया कि वह मुकाबले के दौरान रेफरी के निर्णय से सहमत नहीं थीं। उन्होंने कहा, "मैंने अपना शत प्रतिशत दिया। मुझे लगा कि मैं जीत रही थी, क्योंकि दोनों राउंड में मैंने अच्छा प्रदर्शन किया।"


सुचिका ने अपने परिवार का भी जिक्र किया, जिसमें उनके माता-पिता, चार बहनें और एक भाई शामिल हैं। उन्होंने कहा कि उनके ससुराल में भी उन्हें भरपूर समर्थन मिला है।


उनके कोच निखिल कुंदर ने भी आर्बिट्रेशन के विवादास्पद फैसले पर टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि जब मुकाबला ड्रॉ घोषित हुआ, तो सिंगापुर के पास दो विकल्प थे: काउंटर-आर्बिट्रेशन के लिए जाना या एएमएमए के नियमों के तहत वजन के आधार पर निर्णय लेना।