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सुचिका तारियाल का गोल्ड मेडल सपना एक विवादास्पद नियम से टूटा

सुचिका तारियाल ने एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर एक नया इतिहास रचा, लेकिन 700 ग्राम अधिक वजन के कारण उनका गोल्ड मेडल जीतने का सपना चुराया गया। सेमीफाइनल में ड्रॉ के बावजूद, एक विवादास्पद नियम ने उन्हें बाहर कर दिया। जानें इस घटना की पूरी कहानी और सुचिका की भावनाएं।
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नई दिल्ली में सुचिका का ऐतिहासिक सफर

नई दिल्ली: भारतीय मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) एथलीट सुचिका तारियाल ने एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर एक नया इतिहास रच दिया। हालांकि, उनका गोल्ड मेडल जीतने का सपना एक अजीब नियम के कारण चुराया गया। सुचिका को सेमीफाइनल में 700 ग्राम अधिक वजन के चलते बाहर होना पड़ा, न कि उनके खेल में किसी कमी के कारण। इस अप्रत्याशित निर्णय के बाद, सुचिका मैट पर ही रोने लगीं।


सेमीफाइनल में ड्रॉ के बावजूद हार

60 किलोग्राम भार वर्ग के सेमीफाइनल में सुचिका की भिड़ंत सिंगापुर की हून तेओ से हुई। दोनों के बीच मुकाबला बेहद कड़ा था। रेगुलेशन टाइम और ओवरटाइम खत्म होने के बाद भी जज किसी स्पष्ट नतीजे पर नहीं पहुंच सके। प्रारंभ में, जजों ने तेओ को विजेता घोषित किया, जिस पर भारतीय टीम ने विरोध जताया। उन्होंने $1000 की आधिकारिक फीस देकर फैसले को चुनौती दी। नए जजों के पैनल ने वीडियो फुटेज की समीक्षा की और मुकाबले को ड्रॉ घोषित किया।


अजीब टाई-ब्रेकर नियम

मुकाबला ड्रॉ होने के बाद एशियन मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स एसोसिएशन के नियमों के अनुसार विजेता का निर्णय लिया गया। नियम के अनुसार, यदि मुकाबला ड्रॉ रहे और सभी टाई-ब्रेकर भी बराबर हों, तो मुकाबले के दिन सुबह के आधिकारिक वजन को आधार बनाया जाता है। इस माप में तेओ का वजन 58.5 किलोग्राम था, जबकि सुचिका का वजन 59.2 किलोग्राम। इस आधार पर तेओ को विजेता घोषित किया गया।


सुचिका की भावनाएं

इस निर्णय से सुचिका तारियाल पूरी तरह टूट गईं और उन्होंने मैट पर ही रोना शुरू कर दिया। निराशा और गुस्से के चलते उन्होंने रेफरी और विपक्षी खिलाड़ी से हाथ मिलाने से भी इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने कांस्य पदक जीतकर भारत को एशियन गेम्स के MMA इतिहास का पहला मेडल दिलाया, लेकिन तकनीकी नियम के कारण गोल्ड मेडल का मौका चूक गईं।