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सुप्रीम कोर्ट का अनंत सिंह को आत्मसमर्पण का आदेश, 1 दिसंबर तक लौटें जेल

सुप्रीम कोर्ट ने मोकामा के विधायक अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। यह आदेश तब आया जब उनकी जमानत को चुनौती दी गई थी। अनंत सिंह के वकील ने कोर्ट में बताया कि उनके परिवार में 25 नवंबर को शादी है, जिसके चलते उन्हें सरेंडर करने के लिए एक माह की मोहलत दी गई। इस मामले में बिहार सरकार की जांच भी चल रही है, जिसमें अनंत सिंह की आपराधिक पृष्ठभूमि पर ध्यान दिया गया है। जानें इस मामले की पूरी कहानी और राजनीतिक दबाव के बारे में।
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सुप्रीम कोर्ट का आदेश

नई दिल्ली। मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। यह आदेश तब आया जब पटना हाईकोर्ट द्वारा मार्च में दी गई जमानत को दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने चुनौती दी थी। नीरज ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि अनंत की जमानत रद्द की जाए और उन्हें फिर से जेल भेजा जाए। सुनवाई के दौरान, अनंत के वकील ने बताया कि उनके परिवार में 25 नवंबर को एक शादी है, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया। साथ ही, बिहार सरकार को चार महीने में अपनी जांच पूरी करने के लिए कहा गया है, जिसके बाद अगली सुनवाई होगी।


जमानत की चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर को सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों को यह स्पष्ट किया था कि 30 अक्टूबर को स्थगन नहीं दिया जाएगा। अनंत सिंह ने सितंबर में हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा था। इस मामले में बिहार सरकार को पार्टी नंबर 1 और अनंत सिंह को पार्टी नंबर 2 माना गया है। राज्य सरकार ने 24 अक्टूबर को एफिडेविट पेश किया था।


अनंत सिंह की आपराधिक पृष्ठभूमि

नीरज ने अपनी याचिका में अनंत सिंह की जमानत रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने 19 मार्च को जमानत देते समय अनंत के आपराधिक इतिहास पर ध्यान नहीं दिया। राज्य सरकार के हलफनामे में अनंत सिंह की ‘बहुत भारी क्रिमिनल हिस्ट्री’ का उल्लेख किया गया है, जिसमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और आर्म्स एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में 62 मुकदमे शामिल हैं।


शादी के कारण मिली मोहलत

अनंत सिंह के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनके परिवार में बेटी की शादी 25 नवंबर को है। इसके चलते कोर्ट ने उन्हें शादी के बाद 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया।


राजनीतिक दबाव

अनंत सिंह पर जेडीयू और राज्य सरकार की नजरें टेढ़ी हैं। उन्होंने एमएलसी चुनाव में अपनी पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार को हराने की अपील की थी। इसके बाद पार्टी ने 24 अक्टूबर को अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को जेडीयू से निकाल दिया। राज्य सरकार ने नीलम देवी को राज्यस्तरीय 20 सूत्री समिति से भी हटा दिया है।