सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: फुटपाथ पर चलने का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यह स्पष्ट किया कि हर नागरिक का सुरक्षित और आरामदायक फुटपाथ पर चलना एक मौलिक अधिकार है। अदालत ने सरकार से अनुरोध किया है कि इस अधिकार को कानूनी रूप में मजबूत किया जाए और नगर निगमों तथा स्थानीय निकायों को फुटपाथ बनाने, उन्हें चिन्हित करने और बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी जाए।
संविधान में अधिकार का महत्व
अदालत ने कहा कि चलने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) और अनुच्छेद 21 के अंतर्गत आता है। यह अधिकार मोटर वाहनों के चलने के अधिकार से अधिक महत्वपूर्ण है। सड़क पर फुटपाथ का होना अनिवार्य है, और इसकी जिम्मेदारी शहरी विकास प्राधिकरण, नगर निगम, नगर पालिका और पंचायतों की है।
फैसले की पृष्ठभूमि
यह निर्णय एक पांच वर्षीय बच्चे की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के मुआवजे के मामले में आया है। बच्चा स्कूल जाते समय सड़क पर चल रहा था, तभी एक टैंकर ने उसे टक्कर मार दी। अदालत ने मुआवजे की राशि को बढ़ाकर लगभग 11.45 लाख रुपये कर दिया।
फुटपाथ की कमी की समस्या
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सड़कों पर फुटपाथ का अभाव या उनकी अनदेखी एक पुरानी समस्या है। मोटर वाहनों ने पैदल चलने वालों को नुकसान पहुँचाया है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि पैदल चलना केवल आवाजाही नहीं है, बल्कि यह जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है। यह संस्कृति, स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक परिवर्तन से भी जुड़ा हुआ है।
कानून बनाने की आवश्यकता
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के आवास और शहरी मामलों, ग्रामीण विकास, सड़क परिवहन मंत्रालयों और विधि आयोग को इस विषय पर कानून बनाने के लिए पत्र भेजने का निर्देश दिया है। अदालत का कहना है कि अब शहरों और गांवों में पैदल चलने वालों को समान अधिकार मिलना चाहिए। फुटपाथों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि लोग सुरक्षित रूप से चल सकें।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
सुप्रीम कोर्ट:-
मोटर वाहन अधिनियम पैदल चलने के मौलिक अधिकार को मान्यता देने वाला कानून नहीं है और न ही कभी रहा है। वास्तव में, मोटर वाहन अधिनियम एक बाधा रहा है और कई मायनों में पैदल चलने वालों के अधिकारों को कमजोर करता रहा है। सुरक्षित और आरामदायक पैदल रास्तों का अभाव रहा है। हर जगह मोटर ट्रांसपोर्ट के दबदबे की वजह से सभ्यतागत समस्या रही है।
सुप्रीम कोर्ट के वकील शुभम गुप्ता ने कहा, 'संविधान में अनुच्छेद 21 का दायरा बहुत व्यापक है। इसमें गरिमा के साथ जीने का अधिकार, निजता का अधिकार, पर्यावरण और शिक्षा का अधिकार शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसी संदर्भ में फुटपाथ पर चलने के अधिकार की बात की है। पैदल चलने वालों को भी गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार है। कई मामलों में फुटपाथ पर गाड़ियां चढ़ा दी जाती हैं, सलमान खान केस एक चर्चित उदाहरण है। यह एक ऐसा फैसला है, जिसकी मांग दशकों से विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा की जा रही थी। हमें उम्मीद है कि सरकार इस दिशा में कोई कदम उठाएगी।'
