सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: रेलवे दुर्घटनाओं में टिकट न होने पर भी मिलेगा मुआवजा
यात्रियों को 'सेकेंड क्लास पैसेंजर' कहना संविधान के खिलाफ
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी यात्री के पास ट्रेन का टिकट नहीं है, तो भी उसे मुआवजा देने से इनकार नहीं किया जा सकता। जस्टिस संजय करोल और एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर मुआवजा राशि जारी करने का निर्देश दिया है।
यदि देरी होती है, तो दावे की तारीख से 8% वार्षिक ब्याज भी देना होगा। सर्वोच्च अदालत ने रेलवे दावा ट्रिब्युनल और उच्च न्यायालय के उस निर्णय को रद्द कर दिया, जिसमें टिकट न होने के कारण मृतक को वास्तविक यात्री नहीं माना गया था।
रेलवे में सुधारों और यात्रियों की सुरक्षा पर निर्देश
इस फैसले में, सर्वोच्च अदालत ने रेलवे में सुधारों और यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने रेलवे मैनुअल में 'सेकेंड क्लास पैसेंजर' शब्द पर आपत्ति जताई है।
अदालत ने कहा कि यह शब्द यात्री के खर्च से संबंधित है, लेकिन इसे कोच से जोड़ा जाना चाहिए, न कि यात्री से। भारत में श्रेणी-आधारित भेदभाव का इतिहास रहा है, और इस तरह का वर्गीकरण संविधान की भावना के खिलाफ है।
यात्रियों की सुरक्षा के प्रति सतर्कता जरूरी
अदालत ने रेलवे में स्टाफ बढ़ाने का सुझाव भी दिया ताकि यात्रियों की सुरक्षा में सुधार हो सके। कोर्ट ने कहा कि पर्याप्त मानव संसाधन से टिकट जांच, भीड़ नियंत्रण और त्वरित सहायता प्रदान करना अधिक प्रभावी होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रेन हादसों की जिम्मेदारी केवल रेलवे पर नहीं डाली जा सकती। यात्रियों को अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना चाहिए। चलती ट्रेन पकड़ना और दरवाजे पर लटककर यात्रा करना खतरनाक है।
मध्य प्रदेश के चंद्रकांत की दुर्घटना का मामला
यह मामला नवंबर 2015 का है। मध्य प्रदेश के चंद्रकांत ठक्कर रायपुर से अहमदाबाद जा रहे थे। यात्रा के दौरान वे अहमदाबाद-हावड़ा मेल से गिर गए और उनकी मृत्यु हो गई। हादसे के बाद उनका बैग भी गायब हो गया, जिसमें टिकट होने की बात कही गई थी।
टिकट न मिलने के कारण रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने उन्हें बुनियादी यात्री नहीं माना और मुआवजा देने से इनकार कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों फैसलों को पलटते हुए चंद्रकांत ठक्कर की पत्नी लता ठक्कर को मुआवजा देने का आदेश दिया है।
