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सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और प्रशासन की जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शनों पर सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की पुष्टि की और प्रशासन को संवेदनशीलता से कार्य करने की सलाह दी। सुनवाई में योगी सरकार की भूमिका पर चर्चा हुई, और अदालत ने निर्देश दिया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर मुकदमे वापस लिए जा सकते हैं। हालांकि, गंभीर अपराधों में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। जंतर-मंतर की स्थिति पर भी चिंता जताई गई, और अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
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दिल्ली में NEET पेपर लीक पर सुनवाई

नई दिल्ली। हाल ही में NEET पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर छात्रों द्वारा किए गए प्रदर्शनों और पुलिस की कार्रवाई से संबंधित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश 'सूर्यकांत' की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पीठ ने इस दौरान यह स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन प्रशासन को सामाजिक तनाव को नियंत्रित करने के लिए संवेदनशीलता से काम करना चाहिए।


योगी सरकार की भूमिका पर चर्चा

योगी सरकार के रुख पर हुई बहस

इस सुनवाई के दौरान जब प्रदर्शनकारी युवाओं की मांगों और राज्यों की कड़ी कार्रवाई पर चर्चा हो रही थी, तब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का नाम भी लिया गया। वकीलों के बीच यह सवाल उठाया गया कि क्या आंदोलनकारियों के सामने 'योगी सरकार' झुकेगी? इस पर चीफ जस्टिस 'सूर्यकांत' ने सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों को संयम बरतने की सलाह दी।


सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही कुछ असामाजिक तत्वों ने आंदोलन के दौरान पत्थरबाजी की हो, लेकिन सरकार का आक्रामक रवैया सामाजिक तनाव को और बढ़ा सकता है। युवाओं को शांत करने के लिए उचित सलाह और काउंसलिंग की आवश्यकता है। इसके अलावा, अदालत ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे प्रदर्शनकारी छात्रों और नाबालिगों पर दर्ज मुकदमे वापस ले सकती हैं। केंद्र सरकार ने भी आश्वासन दिया है कि निर्दोष छात्रों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।


अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी

अपराधियों को नहीं मिलेगी कोई राहत

अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन प्रदर्शनकारियों का आपराधिक इतिहास है या जो गंभीर हिंसा में शामिल रहे हैं, उनके खिलाफ FIR और कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई कथित ज्यादतियों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन का निर्देश दिया है।


जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों की स्थिति

जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों को लेकर भी चिंता

सुनवाई के दौरान अदालत ने एक अन्य जनहित याचिका का भी संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया कि जंतर-मंतर अब बड़े प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त नहीं रह गया है। वहां की संकीर्ण रास्तों के कारण आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होती हैं। चीफ जस्टिस ने सॉलिसिटर जनरल 'तुषार मेहता' से कहा कि वे केंद्र सरकार से पूछें कि क्या विरोध प्रदर्शनों के लिए रामलीला मैदान जैसी किसी अन्य सुरक्षित जगह का चयन किया जा सकता है। अदालत ने फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों पर कोई रोक नहीं लगाई है, लेकिन सभी पक्षों से जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।