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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश: दिल्ली में पाबंदियों पर नई गाइडलाइंस

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में लागू पाबंदियों पर विशेष सुनवाई के बाद पांच महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इनमें मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से चलाने की अनुमति दी गई है, साथ ही शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को केवल कानूनी प्रक्रिया के तहत हिरासत में लेने की बात कही गई है। जानें और क्या निर्देश दिए गए हैं और इनका क्या प्रभाव पड़ेगा।
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सुप्रीम कोर्ट का विशेष आदेश

दिल्ली में लागू पाबंदियों पर विशेष सुनवाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने रविवार, 11 अक्टूबर को पांच महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की विशेष बेंच ने स्पष्ट किया कि मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहेंगी और अवैध हिरासत की अनुमति नहीं होगी।


शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शनकारियों को केवल कानूनी प्रक्रिया के तहत ही हिरासत में लिया जा सकता है। यह आदेश मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन से पहले और उसके दौरान लागू पाबंदियों से संबंधित याचिकाओं पर आया है। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी ने शनिवार और रविवार को विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया है।


सुप्रीम कोर्ट के पांच निर्देश


  • मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलेंगी। संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत केवल आवश्यक नियम लागू किए जाएंगे।

  • शहर में लोगों की आवाजाही ट्रैफिक नियमों के अनुसार जारी रहेगी। कानून-व्यवस्था और यातायात की स्थिति के अनुसार बैरिकेड की समीक्षा की जाएगी।

  • इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं की जाएंगी।

  • लोगों की आवाजाही कानून के अनुसार सुचारू रूप से होने दी जाएगी।

  • कानूनी प्रक्रिया के बिना किसी को हिरासत में नहीं लिया जाएगा, विशेषकर BNSS की धारा 163 वाले क्षेत्रों के बाहर शांतिपूर्ण लोगों के जमावड़े पर।


अतिरिक्त निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को निर्देश दिया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को उनके कार्य करने से रोका नहीं जाना चाहिए। बेंच ने यह भी बताया कि सीनियर वकीलों ने कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन की बात की थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बताया कि मेट्रो सेवाएं बंद थीं, नई दिल्ली और निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन भी बंद थे और ट्रैफिक एडवाइजरी जारी नहीं की गई थी।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के निषेधाज्ञा क्षेत्र के बाहर भी बड़ी संख्या में लोगों को परेशान किया गया और अवैध रूप से हिरासत में लिया गया।'


अवमानना याचिका का कारण

शुक्रवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने अधिकारियों से मेट्रो स्टेशन बंद करने पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था। उन्होंने मेट्रो और रेल सेवाओं को पूरी तरह से रोकने के बजाय नियंत्रित करने की सलाह दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जनता को कम से कम परेशानी होनी चाहिए। शनिवार को लगभग 41,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे और कड़े प्रतिबंध लागू थे। अदालत के आदेशों का व्यापक रूप से पालन नहीं किया गया था।