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सुप्रीम कोर्ट ने 105 वर्षीय बुजुर्ग को दी राहत, उम्रकैद की सजा माफ

सुप्रीम कोर्ट ने 105 वर्षीय रसिक चंद्र मंडल को उनकी उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उम्रकैद की सजा से मुक्त कर दिया है। 1988 में हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए रसिक चंद्र मंडल को 1994 से जेल में रखा गया था। अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत को स्थायी करते हुए यह स्पष्ट किया कि उन्हें अब दोबारा जेल नहीं भेजा जाएगा। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और अदालत के निर्णय के पीछे की वजह।
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बुजुर्ग की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए सजा की गई माफ


नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 1988 के हत्या मामले में दोषी 105 वर्षीय रसिक चंद्र मंडल को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। अदालत ने उनकी 2024 में दी गई अंतरिम जमानत को स्थायी करते हुए उनकी शेष सजा माफ कर दी। उम्र और स्वास्थ्य की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि उन्हें अब दोबारा जेल नहीं भेजा जाएगा।


1994 से जेल में बंद थे रसिक चंद्र मंडल

रसिक चंद्र मंडल, जो 1920 में पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में जन्मे थे, को 1994 में हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। उस समय उनकी उम्र 68 वर्ष थी। तब से वे जेल में थे, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट ने 29 नवंबर 2024 को उन्हें जमानत नहीं दी। उनकी उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्हें कई बीमारियों का सामना करना पड़ा।


कलकत्ता हाईकोर्ट खारिज कर दी थी याचिका

2018 में, कलकत्ता हाईकोर्ट ने रसिक चंद्र मंडल की अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने अपनी सजा को चुनौती दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन वहां भी उनकी याचिका अस्वीकृत हो गई।


2021 में सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा

99 वर्ष की आयु में, उन्होंने अपनी उम्र और स्वास्थ्य की समस्याओं का हवाला देते हुए समय से पहले रिहाई की याचिका दायर की। इसके बाद, मई 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, 2024 में उन्हें अंतरिम जमानत मिली, जिसे अब अदालत ने स्थायी रूप से मान्यता दी है।


रसिक चंद्र मंडल ने की थी भाई की हत्या

रसिक चंद्र मंडल ने 1988 में पारिवारिक विवाद के चलते अपने भाई सुरेश मंडल की गोली मारकर हत्या कर दी थी। मृतक की पत्नी की शिकायत पर पुलिस ने रसिक और अन्य को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद 1994 में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई।