सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को चेताया, पैकेज्ड फूड पर वॉर्निंग लेबल लगाने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की अनिच्छा पर सवाल उठाया है। कोर्ट ने कहा कि FSSAI अधिक चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट वाले पैकेज्ड फूड उत्पादों पर वॉर्निंग लेबल लगाने में हिचकिचा रहा है। इसके साथ ही, कोर्ट ने केंद्र सरकार और FSSAI के रवैये पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि क्या ये अधिकारी कॉर्पोरेट दबाव में हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि FSSAI ऐसा नहीं कर सकता, तो वह खुद यह कदम उठाएगा।
बच्चों की सेहत का मामला
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और FSSAI को बताया कि यह मामला नागरिकों, विशेषकर बच्चों की सेहत से जुड़ा है, और इस पर लिए गए निर्णय कॉर्पोरेट दबाव से प्रभावित नहीं होने चाहिए। एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने FSSAI की आलोचना की। याचिकाकर्ता ने बताया कि FSSAI ने पहले भी सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में वॉर्निंग लेबल लगाने पर विचार करने के लिए कहा था।
FSSAI की हिचकिचाहट
कोर्ट ने ध्यान दिया कि FSSAI की मीटिंग के मिनट्स के आधार पर, यह वॉर्निंग लेबल लागू करने में हिचकिचा रहा है। याचिकाकर्ता के वकील ने 7 मार्च को हुई मीटिंग का हवाला देते हुए कहा कि उसमें लिए गए निर्णय कोर्ट के पूर्व निर्देशों के विपरीत थे। FSSAI ने उद्योग के विरोध का हवाला देते हुए वॉर्निंग लेबल के बजाय रोजाना की आवश्यकता की टेबल में जानकारी देने का सुझाव दिया है।
कॉर्पोरेट दबाव का सवाल
कोर्ट ने यह भी बताया कि FSSAI के एफिडेविट में केवल फ़ूड इंडस्ट्री के विरोध का उल्लेख था, जबकि सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सबूतों को नजरअंदाज किया गया। कोर्ट ने पूछा कि क्या FSSAI कॉर्पोरेट कंपनियों के दबाव में झुक रहा है।
सरकार की जिम्मेदारी
बेंच ने केंद्र के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल से सीधे सवाल पूछे कि क्या सरकार आवश्यक कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह एक्शन पब्लिक इंटरेस्ट में लिया जा रहा है। गुस्से में कोर्ट ने पूछा, 'क्या सरकार खुद ऐसा करेगी, या हमें आदेश जारी करना होगा?' ASG ने कोर्ट से अनुरोध किया कि उन्हें सरकार के एक्शन के प्लान के बारे में बताने की अनुमति दी जाए, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार को वही करना होगा जो कोर्ट ने कहा है।
