सुप्रीम कोर्ट ने TMC के फ्रीज किए गए बैंक खातों पर राहत देने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
नई दिल्ली। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से मना कर दिया है, जिसमें पार्टी ने अपने चार फ्रीज किए गए बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति मांगी थी। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और पी.बी. वराले की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए मामले की सुनवाई को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया।
सूत्रों के अनुसार, इन चार खातों में लगभग 804 करोड़ रुपये की राशि जमा है। ये खाते एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक में हैं और पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई के कारण डेबिट-फ्रीज किए गए थे। TMC ने अदालत में तर्क दिया कि खातों के फ्रीज होने से पार्टी के राजनीतिक और संगठनात्मक कार्यों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने के लिए इच्छुक नहीं है। अदालत ने मामले को गुण-दोष के आधार पर तय करने के बजाय कलकत्ता हाईकोर्ट से सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद अभी भी लंबित है। जब यह सवाल अनसुलझा है कि पार्टी की संपत्तियों और खातों पर अधिकार किसका है, तब चार खातों को संचालित करने की अनुमति देने का मुद्दा भी उसी विवाद से संबंधित है।
हाईकोर्ट का पूर्व निर्णय
इससे पहले, कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी TMC की इन चार खातों को संचालित करने की मांग पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी थी। हालांकि, अलग से तीन अन्य फ्रीज खातों से पार्टी के दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए कोर्ट ने एक विशेष अधिकारी की निगरानी में व्यवस्था की थी।
पुलिस की जांच इस मामले में जारी है। सुनवाई के दौरान 35 करोड़ रुपये नकद जमा करने से संबंधित शिकायत का भी उल्लेख किया गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की। वर्तमान में चार बैंक खातों पर लगी रोक बरकरार है और इस मामले में आगे की सुनवाई कलकत्ता उच्च न्यायालय में होगी।
