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सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों को मिली कानूनी छूट पर उठाया सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों के लिए दी गई कानूनी छूट पर सवाल उठाया है। इस मामले में जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए, अदालत ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया है। याचिका में यह तर्क दिया गया है कि यह छूट संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों को सामान्य कानूनी प्रक्रियाओं से बाहर कर सकती है। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी। जानें इस महत्वपूर्ण मामले के बारे में और अधिक जानकारी।
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सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्तों की छूट पर सुनवाई

नई दिल्ली। चुनाव आयोग के प्रमुख और अन्य आयुक्तों को उनके कार्यों के लिए कानूनी कार्रवाई से मिली छूट का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय में पहुंच गया है। मंगलवार को, सुप्रीम कोर्ट ने इस छूट को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और भारतीय निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया। इस कदम ने चुनाव आयुक्तों को दी गई कानूनी सुरक्षा और उनकी जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। याचिका में यह तर्क दिया गया है कि इस प्रकार की व्यापक छूट संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों को सामान्य कानूनी प्रक्रियाओं से बाहर कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा। यह याचिका मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा की शर्तों और कार्यकाल से संबंधित 2023 के कानून की धारा 16 को चुनौती देती है। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होने की संभावना है। विवाद का केंद्र वह प्रावधान है, जो पूर्व या वर्तमान में कार्यरत मुख्य चुनाव आयुक्तों और चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों के दौरान किए गए कार्यों, कार्यविधियों या कहे गए शब्दों के लिए दीवानी और आपराधिक मुकदमों से सुरक्षा प्रदान करता है।