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सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर हिंसा मामले में जांच समिति को तेज़ी से कार्य करने के निर्देश दिए

सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति को तेज़ी से कार्य करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने समिति की संरचना पर उठाए गए सवालों को खारिज करते हुए कहा कि जांच में निष्पक्षता आवश्यक है। इसके अलावा, गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष उपायों का सुझाव दिया गया है। 14 वर्षीय एक प्रदर्शनकारी को जान से मारने की धमकियों के मद्देनजर, दिल्ली पुलिस को सुरक्षा प्रदान करने का आदेश भी दिया गया है। अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।
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जांच समिति को सख्त निर्देश

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने उच्च स्तरीय जांच समिति (HPEC) को तेजी से कार्य करने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में पीठ ने समिति के सदस्यों में किसी भी प्रकार के बदलाव को अस्वीकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि समिति को पहले प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन के उपयोग, महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित बदसलूकी और संपत्ति को हुए नुकसान की जांच को प्राथमिकता देनी चाहिए।


सुप्रीम कोर्ट ने समिति की संरचना पर उठाए गए सवालों को खारिज किया

जांच शुरू होने से पहले संदेह करना जल्दबाजी:
सुनवाई के दौरान कुछ याचिकाकर्ताओं ने HPEC की संरचना पर सवाल उठाते हुए इसके पुनर्गठन की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को ठुकराते हुए कहा कि समिति ने अभी तक अपनी जांच शुरू नहीं की है, इसलिए पूर्वाग्रह के आधार पर सवाल उठाना जल्दबाजी होगी। अदालत ने कहा कि HPEC किसी एक पक्ष के हित में नहीं, बल्कि निष्पक्षता के लिए बनाई गई है। इसके अलावा, प्रशासनिक कार्यों के लिए समिति में जल्द ही एक सदस्य सचिव नियुक्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं।


गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश

गवाहों की पहचान रहेगी गुप्त:
अदालत ने HPEC को निर्देश दिया कि जांच के दौरान संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उनकी पहचान को गोपनीय रखा जाए। गवाहों के बयान और साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए एक अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाने का सुझाव दिया गया है, ताकि वे बिना किसी डर के अपने दस्तावेज जमा कर सकें। मामले में स्वतंत्र मध्यस्थता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मोनिका गुसैन और एओआर सी. सोलोमन को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया है।


14 वर्षीय प्रदर्शनकारी को सुरक्षा प्रदान की जाएगी

दिल्ली पुलिस को सुरक्षा का आदेश:
सुनवाई के दौरान 14 वर्षीय एक नाबालिग प्रदर्शनकारी की सुरक्षा का मामला भी उठाया गया। अदालत को बताया गया कि लड़की और उसके परिवार को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को तुरंत खतरे का आकलन कर परिवार को सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया। साथ ही, धमकी देने वालों के खिलाफ त्वरित जांच कर अगली सुनवाई से पहले स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है। अदालत अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को करेगी।