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सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर जताई चिंता, ठगी रोकने के लिए उठाए कदम

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, जिसमें शिक्षित लोग भी ठगी का शिकार हो रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मोबाइल फोन पर गिरफ्तारी की धमकी पर विश्वास नहीं करना चाहिए। सुनवाई में एक महिला के 2.5 करोड़ रुपये खोने का मामला भी सामने आया। अदालत ने बैंकों की जिम्मेदारी और साइबर अपराधों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। यदि कोई व्यक्ति गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे मांगता है, तो तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन पर शिकायत करें।
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सुप्रीम कोर्ट की चिंता

नई दिल्ली: देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल अरेस्ट स्कैम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। 29 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में हुई सुनवाई में यह सवाल उठाया गया कि लोग पुलिस गिरफ्तारी के नाम पर ठगों के जाल में कैसे फंस जाते हैं। अदालत ने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में मोबाइल फोन के जरिए गिरफ्तारी की बात पर विश्वास नहीं करना चाहिए।


जागरूकता के बावजूद ठगी का शिकार

सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश ने इस बात पर नाराजगी जताई कि जागरूकता अभियानों और मीडिया में खबरों के बावजूद, शिक्षित लोग भी धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। अदालत ने कहा कि केवल घटना के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ठगी को रोकने के लिए ठोस उपायों की आवश्यकता है।


महिला ने खोए 2.5 करोड़ रुपये

सुनवाई में न्याय मित्र ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने एक हालिया घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक महिला को इस तरह के घोटाले में 2.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।


गिरफ्तारी का डर

CJI सूर्यकांत ने सवाल किया कि जब लोगों को इस तरह के अपराधों के बारे में बताया जा रहा है, तो वे ठगों के जाल में क्यों फंस रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन पर किसी अधिकारी के वीडियो कॉल करने या गिरफ्तारी की धमकी देने से वास्तविक गिरफ्तारी नहीं होती।


बैंकों की जिम्मेदारी

सुनवाई के दौरान, अदालत ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों की जिम्मेदारी पर जोर दिया। CJI ने पूछा कि जब संदिग्ध खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर होती है, तो उसे रोकने के लिए प्रभावी तंत्र क्यों नहीं है।


RBI और साइबर एजेंसियों की भूमिका

अटॉर्नी जनरल ने अदालत को बताया कि इस दिशा में प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि बैंक अब संदिग्ध लेन-देन की पहचान करने में अधिक सक्रिय हैं। हालांकि, CJI ने कहा कि केवल जांच और कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे संदिग्ध लेन-देन को समय पर रोका जा सके।


बैंकों की जवाबदेही

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि डिजिटल ठगी को रोकने के लिए बैंकों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है। अदालत ने कहा कि यदि वित्तीय संस्थान संदिग्ध लेन-देन पर समय पर रोक नहीं लगाते हैं, तो केवल जागरूकता अभियान से समस्या का समाधान नहीं होगा।


धोखाधड़ी से बचने के उपाय

डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग अक्सर खुद को पुलिस या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। यदि कोई व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे मांगता है, तो सतर्क रहें और तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।