सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को हिंदी शिक्षा पर दी चेतावनी
तमिलनाडु सरकार की हिंदी नीति पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की हिंदी शिक्षा के प्रति दृष्टिकोण पर गंभीर टिप्पणी की है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राज्य को हिंदी के प्रति अपनी सोच में बदलाव लाने की आवश्यकता है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने गुरुवार को कहा कि यह अस्वीकार्य है कि तमिलनाडु में हिंदी का अध्ययन नहीं किया जाएगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने चेन्नई और दिल्ली के बीच अलगाव की सोच पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि चेन्नई के निवासियों को दिल्ली से अलग नहीं होना चाहिए और न ही दिल्ली को चेन्नई से। दरअसल, तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें हर जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने का निर्देश दिया गया था।
राज्य सरकार का तर्क है कि नवोदय विद्यालयों की स्थापना उसकी शिक्षा और भाषा नीति के अनुरूप नहीं है। इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपनी राय व्यक्त की। नवोदय विद्यालय केंद्र सरकार द्वारा संचालित आवासीय स्कूल हैं, जहां लड़के और लड़कियां दोनों पढ़ाई करते हैं और रहने की व्यवस्था भी होती है। ये विद्यालय नवोदय विद्यालय समिति द्वारा संचालित होते हैं, जो केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत है। राज्य सरकार की मुख्य आपत्ति इन विद्यालयों में पढ़ाई जाने वाली भाषाओं से संबंधित है, क्योंकि नवोदय विद्यालयों में तीन भाषाओं की पढ़ाई होती है, जिसमें हिंदी भी शामिल है। इसी कारण तमिलनाडु की सरकारें इन विद्यालयों का विरोध करती रही हैं।
