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सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी जज पर कसा शिकंजा, इलाहाबाद हाईकोर्ट को भेजा नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश पर दुष्कर्म के आरोपों के चलते कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को नोटिस जारी कर 11 दिसंबर तक जवाब मांगा है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि आरोपी जज ने शादी का झूठा वादा कर यौन शोषण किया। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई के बारे में।
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सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (ADJ) पर दुष्कर्म के गंभीर आरोपों के चलते सुप्रीम कोर्ट ने सख्त कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने उस याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है, जिसमें कहा गया है कि बलात्कार के मामले में चार्जशीटेड होने के बावजूद यह न्यायिक अधिकारी संवेदनशील पॉक्सो (POCSO) मामलों की विशेष अदालत का कार्यभार संभाल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर स्थिति पर ध्यान देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रशासन को औपचारिक नोटिस जारी किया है और 11 दिसंबर तक जवाब मांगा है।


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए आदेश जारी किया। याचिकाकर्ता पीड़िता की ओर से वरिष्ठ वकील राकेश कुमार सिंह ने अदालत में तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिस न्यायिक अधिकारी के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने दुष्कर्म का चार्जशीट दाखिल किया है, उससे न्यायिक कार्य तुरंत वापस लेना चाहिए था। वकील ने बताया कि जब उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में यह मांग की, तो उनकी याचिका खारिज कर दी गई, जिसके बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।


यौन शोषण का मामला

मैट्रिमोनियल साइट पर हुई थी मुलाकात
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, पीड़िता ने 8 दिसंबर 2022 को दिल्ली के मयूर विहार पुलिस स्टेशन में न्यायिक अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। महिला का आरोप है कि उसकी मुलाकात उस अधिकारी से एक लोकप्रिय मैट्रिमोनियल साइट के माध्यम से हुई थी। आरोपी ने शादी का झूठा वादा किया और लंबे समय तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाकर यौन शोषण किया। जब वह अपने वादे से मुकर गया, तो पीड़िता ने दिल्ली पुलिस का सहारा लिया।


दिल्ली पुलिस की कार्रवाई

दिल्ली पुलिस ने मांगी थी अनुमति
एफआईआर के बाद जनवरी 2023 में दिल्ली पुलिस ने आरोपी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से औपचारिक अनुमति मांगी थी। इस बीच, मार्च 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट ने संबंधित जज को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी, लेकिन पुलिस को निष्पक्ष जांच जारी रखने की अनुमति दी गई थी। जून 2023 में दिल्ली पुलिस द्वारा भेजे गए रिमाइंडर के जवाब में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी अधिकारी के खिलाफ पहले से ही आंतरिक विजिलेंस जांच चल रही है। इसके बाद अक्टूबर 2024 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने आरोपी को पुलिस जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद न्यायिक सेवा में इस मामले पर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।