सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को दी राहत, अवमानना कार्यवाही पर रोक
पंजाब के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते का मामला
नई दिल्ली: पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया महंगाई भत्ते से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को महत्वपूर्ण कानूनी राहत प्रदान की है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान, शीर्ष अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा शुरू की गई आपराधिक और दीवानी अवमानना कार्यवाहियों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव को अवमानना मामले में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने स्थगित कर दिया है।
लिक्विडेशन प्लान की समयसीमा
सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना कार्यवाहियों पर रोक लगाने के साथ ही पंजाब सरकार को कर्मचारियों के बकाए के निपटारे के लिए स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अदालत ने राज्य सरकार को 1 दिसंबर तक एक विस्तृत लिक्विडेशन प्लान पेश करने का आदेश दिया है, जिसमें यह बताया जाएगा कि कर्मचारियों और पेंशनरों के डीए बकाए का भुगतान किस वित्तीय योजना के तहत किया जाएगा। इसके अलावा, अदालत ने 31 मार्च 2027 तक कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से भुगतान की योजना की जानकारी भी मांगी है।
जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ का निर्णय
यह निर्णय जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने पंजाब सरकार की विशेष अपील पर सुनवाई के दौरान दिया। पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेशों का गहन अध्ययन किया। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, मुख्य सचिव को 5 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने कर्मचारियों के भत्ते से जुड़े विवाद और राज्य के वित्तीय हालात पर अदालत को जानकारी दी।
अवमानना कार्यवाहियों पर रोक
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्देश दिया कि हाईकोर्ट में चल रही आपराधिक अवमानना की सभी कार्यवाहियों को अगले आदेश तक स्थगित रखा जाए। इसके साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि सिविल अवमानना मामले में भी राज्य सरकार या उसके शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। इस निर्णय से पंजाब सरकार के प्रशासनिक अमले ने राहत की सांस ली है, और अब सभी की नजरें 1 दिसंबर को पेश किए जाने वाले वित्तीय भुगतान रोडमैप पर हैं।
