सुप्रीम कोर्ट ने बोफोर्स मामले को किया समाप्त, 40 साल पुराना विवाद खत्म
बोफोर्स केस का अंत
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय राजनीति में हलचल मचाने वाले बोफोर्स खरीद मामले को समाप्त कर दिया है। गुरुवार को, कोर्ट ने इस मामले से संबंधित अंतिम याचिका को भी खारिज कर दिया, जिससे यह लगभग 40 साल पुराना मामला पूरी तरह से समाप्त हो गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब इस मामले में आगे सुनवाई की आवश्यकता नहीं है। यह मामला 1986 में भारत सरकार और स्वीडन की एबी बोफोर्स कंपनी के बीच 1,437 करोड़ रुपये की तोप खरीद डील से संबंधित है।
राजीव गांधी की हार का कारण
1987 में यह खुलासा हुआ था कि इस सौदे को हासिल करने के लिए कथित तौर पर रिश्वत दी गई थी। इस घोटाले के आरोपों के कारण राजीव गांधी को 1989 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद से बोफोर्स मामला देश के प्रमुख राजनीतिक घोटालों में से एक बन गया। कोर्ट ने 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली अपील को सुनने से मना कर दिया, जिसमें हिंदुजा ब्रदर्स और बोफोर्स कंपनी को बरी किया गया था।
बोफोर्स केस का इतिहास
यह मामला 1986 में भारत सरकार और एबी बोफोर्स के बीच 1,437 करोड़ रुपये की तोप खरीद डील से जुड़ा है, जिसमें भारतीय सेना के लिए 400 हॉवित्जर तोपें शामिल थीं। 1987 में यह सामने आया कि इस सौदे को हासिल करने के लिए भारतीय राजनेताओं और रक्षा अधिकारियों को रिश्वत दी गई थी। इस घोटाले में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम भी आया था।
जांच की जटिलताएँ
यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा, लेकिन अदालत में टिक नहीं सका। इसकी मुख्य वजह सबूतों की कमी थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2005 में कहा कि सीबीआई आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं दे सकी। इसके अलावा, स्वीडन से प्राप्त दस्तावेज भी असली साबित नहीं हो सके, जिससे कोर्ट ने उन्हें मान्यता देने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की लंबी सुनवाई पर आश्चर्य व्यक्त किया। याचिकाकर्ता के वकील ने कुछ मृत व्यक्तियों के नाम हटाने के लिए चार हफ्ते का समय मांगा, जिस पर जस्टिस पारदीवाला ने सख्त सवाल उठाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब इस मामले को और आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के साथ ही बोफोर्स पे-ऑफ केस से संबंधित सभी कानूनी लड़ाई समाप्त हो गई है।
जांच पर खर्च

250 करोड़ रुपये की जांच
31 मई 2005 को दिल्ली हाईकोर्ट ने हिंदुजा ब्रदर्स और एबी बोफोर्स के खिलाफ सभी आपराधिक कार्यवाहियों को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने सीबीआई की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस जांच पर सरकारी खजाने से लगभग 250 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
