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सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला परिसर में नमाज के लिए मुस्लिम समुदाय को दी अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर में मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने के लिए एक अलग स्थान मुहैया कराने का आदेश दिया है। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक अंतिम निर्णय नहीं हो जाता। अदालत ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए दोनों पक्षों से संयम बनाए रखने की अपील की है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और अदालत के निर्देशों के बारे में।
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भोजशाला परिसर में नमाज के लिए अंतरिम निर्देश


नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने धार में विवादित भोजशाला परिसर के मामले में मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज अदा करने के लिए परिसर के निकट एक अलग स्थान मुहैया कराने का अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था अंतिम निर्णय तक लागू रहेगी।


प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को निर्देश दिया कि विवादित परिसर में बिना अदालत की अनुमति के कोई भी संरचनात्मक परिवर्तन नहीं किया जाएगा।


सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए दोनों पक्षों से संयम बनाए रखने की अपील की। पीठ ने कहा कि अदालत इस विवाद का शीघ्र समाधान चाहती है और इसे 10 से 15 दिनों के भीतर उपयुक्त पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।


सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे मामलों में अदालत को हर शब्द का चयन बेहद सावधानी से करना पड़ता है, क्योंकि कोई भी टिप्पणी अनावश्यक विवाद या गलत संदेश का कारण बन सकती है।


सुप्रीम कोर्ट मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के 15 मई के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर माना गया था। उच्च न्यायालय ने एएसआई के उस पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को परिसर में शुक्रवार की नमाज की अनुमति दी जाती थी।


मुस्लिम पक्ष द्वारा तत्काल सुनवाई की मांग के बाद सर्वोच्च अदालत ने याचिकाओं में तकनीकी त्रुटियों को दूर करने के निर्देश दिए थे और इसके बाद मामले को शीघ्र सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।