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सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज की, कहा- चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकते

मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उनका नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा खारिज कर दिया गया था, जिसे उन्होंने चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। मीनाक्षी ने इसे संविधान और लोकतंत्र की हार बताया। इस मामले में वरिष्ठ वकील ने तर्क दिया कि आरोप तय नहीं होने पर नामांकन खारिज नहीं किया जा सकता।
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सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज की, कहा- चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकते

मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से झटका

मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। रिटर्निंग ऑफिसर ने उनके नामांकन को खारिज कर दिया था, जिसे उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। शुक्रवार को सुनवाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उनकी याचिका को खारिज कर दिया। मीनाक्षी ने इस निर्णय पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह केवल उनकी हार नहीं, बल्कि देश के संविधान और लोकतंत्र की हार है।


सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जज प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस चांदुरकर की बेंच ने की। बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 329 का हवाला देते हुए हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। अनुच्छेद 329 के अनुसार, कोई भी अदालत चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया।


नामांकन खारिज होने का कारण

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र इस आधार पर खारिज किया गया था कि उन्होंने अपने खिलाफ चल रहे एक आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई थी। इस मामले में मीनाक्षी की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि जिस मामले का जिक्र किया जा रहा है, उसमें उनके खिलाफ आरोप तय नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधित्व कानून के अनुसार, बिना आरोप तय हुए किसी मामले का उल्लेख करना आवश्यक नहीं है, इसलिए नामांकन खारिज नहीं किया जा सकता।


मीनाक्षी नटराजन की प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर मीनाक्षी नटराजन ने कहा, 'यह मेरी व्यक्तिगत हार नहीं है, बल्कि यह भारत के लोकतंत्र और संविधान की हार है। चुनाव आयोग ने यह निर्णय लिया है। मेरे खिलाफ कोई आरोप नहीं है। चुनाव आयोग के रिटर्निंग ऑफिसर ने समझौता किया है, जैसा मैंने पहले भी कहा था। चुनाव आयोग ने हमारे लोगों से 48 घंटे तक कोई जवाब नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट ने हमारी बात सुनी और फिर निर्णय दिया। चुनाव आयोग ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। हमारा मामला रिटर्निंग ऑफिसर और चुनाव आयोग के खिलाफ है, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने अपना वकील खड़ा किया है, जिससे स्पष्ट होता है कि क्या सांठगांठ चल रही है।'


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