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सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को नदी प्रदूषण मामले में फटकार लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की सरकार को नदी प्रदूषण के मामले में कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने विशेष कार्य बल के गठन का निर्देश दिया है, जो तीन सप्ताह में 20-सूत्रीय कार्ययोजना पेश करेगा। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता ने औद्योगिक अपशिष्ट के खिलाफ कार्रवाई की कमी पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने तंत्र को नियमों के उल्लंघन पर तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
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मुख्य सचिव के नेतृत्व में विशेष कार्य बल का गठन


River Pollution Case, नई दिल्ली: जोजरी, लूणी और बनास नदियों में बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान, कोर्ट ने राजस्थान की भजन लाल सरकार को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि नागरिकों को जहर देना अत्यंत शर्मनाक है।


औद्योगिक अपशिष्ट के खिलाफ कार्रवाई की कमी पर सवाल

कोर्ट ने मुख्य सचिव की अगुवाई में एक विशेष कार्य बल बनाने का निर्देश दिया है, जिसमें सभी संबंधित विभाग और एजेंसियां शामिल होंगी। यह कार्य बल उच्च स्तरीय समिति के साथ मिलकर काम करेगा और तीन सप्ताह के भीतर 20-सूत्रीय कार्ययोजना प्रस्तुत करेगा।


जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह भी पूछा कि नदियों में अवैध रूप से केमिकल कचरा छोड़ने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट ने पहले की गई एसआईटी जांच को केवल एक दिखावा करार दिया।


तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता

जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि शासन तंत्र को 'ऑटो मोड' पर काम करना चाहिए। नियमों के उल्लंघन का तुरंत पता लगाकर बिना न्यायिक हस्तक्षेप के सुधारात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।


अदालत ने राजस्थान सरकार को पाली औद्योगिक क्षेत्र को हटाने या स्थानांतरित करने का निर्णय लेने और प्राथमिकता के आधार पर एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के निर्देश भी दिए हैं। जोजरी-बांडी-लूणी नदी तंत्र का प्रदूषण लंबे समय से न्यायिक निगरानी में है।