सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में बच्चों के दुरुपयोग पर जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक नाबालिग बच्चे के माध्यम से उसकी बुआ पर लगाए गए झूठे पोक्सो आरोपों को रद्द कर दिया है। अदालत ने इस मामले में सख्त टिप्पणी की, यह कहते हुए कि पारिवारिक विवादों में बच्चों का उपयोग करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
यह मामला एक तलाक और बच्चों की कस्टडी के विवाद से संबंधित है, जिसमें एक तलाकशुदा मां ने अपने बेटे की ओर से उसकी बुआ पर गंभीर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गहराई से जांच की और पाया कि यह एफआईआर किसी वास्तविक अपराध का परिणाम नहीं है, बल्कि यह एक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित एक साजिश थी।
बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल
कोर्ट ने यह भी पाया कि जब सितंबर 2023 में तलाक हुआ था, तब ऐसे आरोप नहीं लगाए गए थे। इसके अलावा, मजिस्ट्रेट के समक्ष बच्चे के बयान में भी इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस निर्णय की आलोचना की, जिसमें बिना उचित रिकॉर्ड की समीक्षा किए मामले को खारिज करने से इनकार किया गया था।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जब न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग निजी हितों के लिए किया जाने लगे, तो न्यायपालिका मूकदर्शक नहीं रह सकती।
मामले की वकील सना रईस खान ने अदालत को बताया कि यह मुकदमा कानूनी प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग है।
जस्टिस जेबी पाडीर्वाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इस गंभीर स्थिति को समझते हुए पुणे के खडकी पुलिस स्टेशन में दर्ज पोक्सो और आईपीसी धाराओं के तहत बुआ के खिलाफ दर्ज एफआईआर को पूरी तरह से रद्द कर दिया।
