सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर बच्चों के यौन शोषण के मामलों पर केंद्र को नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
नई दिल्ली - सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए सवाल उठाया कि इंस्टाग्राम और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों के यौन शोषण से संबंधित मामलों की रिपोर्ट पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों को क्यों नहीं भेज रहे हैं।
2024 में, सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा था कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी को देखना और डाउनलोड करना एक अपराध है, और सोशल मीडिया मध्यस्थों के लिए ऐसे कंटेंट की रिपोर्ट करना अनिवार्य है। यदि ये प्लेटफॉर्म ऐसे मामलों की रिपोर्ट नहीं करते हैं, तो वे आपराधिक रूप से जिम्मेदार ठहराए जा सकते हैं।
एक एनजीओ, जस्ट राइट्स फॉर चाइल्ड, द्वारा दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र और सोशल मीडिया मध्यस्थ सुप्रीम कोर्ट के 2024 के निर्णय का पालन नहीं कर रहे हैं। इस पर कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया और पूछा कि ये प्लेटफॉर्म चाइल्ड पोर्नोग्राफी की रिपोर्ट क्यों नहीं कर रहे हैं।
सीनियर एडवोकेट एच.एस. फुल्का ने कहा, "इस समय इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण के वीडियो तेजी से फैल रहे हैं और उन्हें बढ़ावा भी दिया जा रहा है। भारत सरकार ने इंस्टाग्राम पर सख्त कदम उठाए हैं। हालांकि, 2 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय में स्पष्ट किया कि सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, चाहे वह मेटा हो, टेलीग्राम हो या अन्य, की जिम्मेदारी है कि जब भी बच्चों के यौन शोषण का कोई वीडियो सामने आए, तो उसे न केवल ब्लॉक करें बल्कि पुलिस को इसकी रिपोर्ट भी करें।"
फुल्का ने आगे कहा, "सोशल मीडिया पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी को डाउनलोड करने और देखने वालों के खिलाफ पोक्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। ऐसे वीडियो को डाउनलोड कर वायरल करने वालों को 7 साल की सजा हो सकती है।"
