सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या राम मंदिर के निर्माण पर नई याचिका दायर
नई याचिका का विवरण
नई दिल्ली: अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण से संबंधित एक नई और संवेदनशील याचिका सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की गई है। इस याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि यह जांचा जाए कि वर्तमान में निर्मित राम मंदिर उसी स्थान पर है, जिस पर 2019 में शीर्ष अदालत ने अपना ऐतिहासिक निर्णय सुनाया था। इस याचिका के आने के बाद कानूनी और प्रशासनिक हलकों में फिर से चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
स्वतंत्र सीमांकन और तकनीकी विशेषज्ञों की मांग
श्री राम जन्मभूमि केस ट्रस्ट द्वारा दायर की गई इस याचिका में 2019 के निर्णय के अनुसार विवादित भूमि का स्वतंत्र सर्वेक्षण और सटीक सीमांकन कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि अदालत द्वारा निर्धारित भूमि की सटीक सीमाएं, अक्षांश-देशांतर (कोऑर्डिनेट्स), वास्तविक विस्तार और भौगोलिक पहचान की तकनीकी पुष्टि की जानी चाहिए। इसके लिए अदालत की निगरानी में एक स्वतंत्र समिति या आयोग गठित करने की मांग की गई है, जिसमें भूमि सर्वेक्षण, राजस्व विभाग, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और अन्य संबंधित तकनीकी क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हों।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की तारीख
सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की गई कॉज लिस्ट के अनुसार, इस महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई 2 नवंबर को होगी। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ के समक्ष होगी। सुनवाई के दौरान पीठ यह तय करेगी कि 2019 के अंतिम फैसले के निष्पादन और सीमांकन को लेकर दायर इस याचिका पर नोटिस जारी किया जाए या नहीं।
2019 का ऐतिहासिक निर्णय
यह ध्यान देने योग्य है कि सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने 9 नवंबर 2019 को दशकों पुराने अयोध्या विवाद पर सर्वसम्मति से ऐतिहासिक निर्णय सुनाया था। उस निर्णय में अदालत ने विवादित 2.77 एकड़ भूमि का मालिकाना हक राम लला विराजमान को सौंपते हुए केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण की देखरेख के लिए एक ट्रस्ट गठित करने का आदेश दिया था। साथ ही, मुस्लिम पक्ष (सुन्नी वक्फ बोर्ड) को अयोध्या में किसी प्रमुख स्थान पर एक नई मस्जिद के निर्माण के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक भूमि आवंटित करने का निर्देश दिया गया था। अब उसी फैसले के आधार पर चिन्हित भूमि और वर्तमान मंदिर निर्माण की स्थिति का मिलान कराने के लिए यह नई कानूनी पहल की गई है।
