सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयुक्तों को दी गई कानूनी सुरक्षा पर चुनौती
मुख्य चुनाव आयुक्तों की सुरक्षा पर सुनवाई
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को उनके कार्यों के लिए दी गई आजीवन कानूनी सुरक्षा को चुनौती दी गई है। इस मामले की सुनवाई बुधवार को हुई, जिसमें केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया गया। 2023 के कानून की धारा 16 के तहत चुनाव आयुक्तों को उनके सरकारी कार्यों के दौरान लिए गए निर्णयों के लिए आपराधिक मुकदमों से सुरक्षा प्रदान की गई है।
याचिका में धारा 16 की वैधता पर सवाल उठाया गया है। इसमें यह पूछा गया है कि क्या चुनाव आयुक्तों को इस प्रकार की कानूनी सुरक्षा देना संविधान के अनुरूप है? चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने इस मामले में नोटिस जारी किया। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और वकील अरुण कुमार अग्रवाल द्वारा दायर की गई है।
इस कानून के अनुसार, चुनाव आयुक्तों के खिलाफ उनके आधिकारिक कार्यों से संबंधित किसी भी मामले में अदालत कार्यवाही शुरू नहीं कर सकती। यदि पहले से कोई कार्यवाही चल रही है, तो अदालत उसे आगे नहीं बढ़ा सकती। यह सुरक्षा केवल उनके कार्यकाल के दौरान ही नहीं, बल्कि पद छोड़ने के बाद भी लागू रहती है। यह संरक्षण उन कार्यों पर लागू होता है जो चुनाव आयुक्त के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान किए गए हैं।
