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सुप्रीम कोर्ट से राहुल गांधी को मिली बड़ी राहत, सावरकर पर टिप्पणी का मामला रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को सावरकर पर की गई टिप्पणी के मामले में बड़ी राहत दी है। अदालत ने आपराधिक शिकायत और समन को रद्द करते हुए कहा कि इस मामले में आवश्यक कानूनी मंजूरी नहीं ली गई थी। यह मामला तब शुरू हुआ जब राहुल ने सावरकर को अंग्रेजों का सहयोगी बताया था। अदालत ने सुनवाई के दौरान राहुल के बयान पर नाराजगी भी व्यक्त की थी। जानें इस मामले की पूरी कहानी और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के पीछे की वजहें।
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला


नई दिल्ली। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। अदालत ने हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर पर की गई टिप्पणियों के संबंध में उनके खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत और समन को रद्द कर दिया है।


सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू शामिल थे, ने राहुल गांधी की याचिका को स्वीकार कर लिया। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि इस मामले में राहुल के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक कानूनी मंजूरी नहीं ली गई थी। कोर्ट ने कहा कि हमने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनी हैं, लेकिन यूपी सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे में मंजूरी का कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए, मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश को रद्द किया जाता है।


मामले का विवरण

यह मामला 17 नवंबर 2022 का है, जब राहुल गांधी अपनी 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान सावरकर के बारे में टिप्पणी कर रहे थे। उन्होंने सावरकर को अंग्रेजों का सहयोगी बताते हुए कहा था कि उन्हें अंग्रेजों से पेंशन मिलती थी। इस बयान के खिलाफ वकील नृपेंद्र पांडेय ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि यह बयान समाज में नफरत फैलाने के उद्देश्य से दिया गया था। शिकायत में यह भी कहा गया था कि महात्मा गांधी ने सावरकर को एक देशभक्त माना था। राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153A (शत्रुता को बढ़ावा देना) और 505 (सार्वजनिक रूप से भड़काऊ बयान) के तहत आरोप लगाए गए थे।


मामले की समयरेखा

जून 2023: मामले की शुरुआत में एक अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने वकील नृपेंद्र पांडेय की शिकायत को खारिज कर दिया।


सेशन कोर्ट: पांडेय ने ACJM के फैसले को सेशन कोर्ट में चुनौती दी, जिसने उनकी याचिका को मंजूर करते हुए मामला वापस मजिस्ट्रेट कोर्ट भेज दिया।


दिसंबर 2024: लखनऊ की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राहुल के बयान को समाज में वैमनस्य फैलाने वाला मानते हुए समन जारी किया।


अप्रैल 2025: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राहुल को राहत देने से इनकार कर दिया।


सुप्रीम कोर्ट का रुख: इसके बाद राहुल ने समन रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।


सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी

हालांकि अब मामला रद्द हो गया है, लेकिन सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के बयान पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी। कोर्ट ने कहा था कि यदि राहुल ने फिर से ऐसे बयान दिए, तो वह स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगा। बेंच ने यह भी कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों पर कोई टिप्पणी नहीं होनी चाहिए।


सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि राहुल गांधी की दादी, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी सावरकर की तारीफ की थी।